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JAMSHEDPUR NEWS: ‘वनवासी’ शब्द पर भड़का आदिवासी समाज, साकची में अमित शाह और भाजपा नेताओं का फूंका पुतला

जमशेदपुर: दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय आदिवासी समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों के लिए “वनवासी” शब्द का प्रयोग किए जाने के बाद झारखंड में सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। इस बयान के कड़े विरोध में शुक्रवार को जमशेदपुर के साकची गोलचक्कर पर आदिवासी समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ भाजपा के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों का पुतला दहन कर अपना भारी विरोध दर्ज कराया।

साकची गोलचक्कर पर गूंजे विरोध के स्वर

इस उग्र प्रदर्शन में आदिवासी समाज के हजारों महिला-पुरुष और युवा शामिल हुए। साकची गोलचक्कर पर हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। पूरे इलाके में “हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं”, “सरना धर्म की मान्यता दो” और “आदिवासी अस्मिता का अपमान बंद करो” जैसे गगनभेदी नारे गूंजते रहे। समाज के लोगों का स्पष्ट कहना था कि उनकी अपनी एक अलग और समृद्ध पहचान, संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था है, जिसे राजनीतिक फायदे के लिए लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

आदिवासी अस्मिता और सरना धर्म की मांग

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि “वनवासी” शब्द का बार-बार इस्तेमाल करना आदिवासी समाज की मूल पहचान और उनके इतिहास को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज पूरी तरह से ‘सरना धर्म’ को मानता है और उनकी सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान हिंदू समाज से बिल्कुल अलग है। ऐसे में उन्हें वनवासी कहना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह पूरे आदिवासी समुदाय की गरिमा और अस्मिता का घोर अपमान भी है।

संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हो रहा हनन

प्रदर्शनकारियों ने याद दिलाया कि आदिवासी इस देश के असली और मूल निवासी हैं। भारतीय संविधान ने उन्हें विशेष अधिकार और एक अलग पहचान दी है। इसके बावजूद, बड़े राजनीतिक मंचों से बार-बार उनकी इस पहचान को बदलने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसे आदिवासी समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। समाज ने एकजुट होकर कहा कि वे अपने हक और पहचान की लड़ाई मजबूती से लड़ेंगे।

पुलिस की मुस्तैदी और उग्र आंदोलन की चेतावनी

पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान साकची गोलचक्कर पर कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई और माहौल काफी गर्म हो गया था। हालांकि, मौके पर भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। अंत में, आदिवासी समाज के लोगों ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में उनके समुदाय के खिलाफ इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी दोबारा की गई, तो यह आंदोलन केवल शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य में व्यापक रूप लेगा।

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