
जमशेदपुर : टाटा कंपनी प्रबंधन और डिमना डैम से विस्थापित हुए परिवारों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए 10 मार्च को वार्ता आयोजित की जाएगी. यह जानकारी विस्थापित आंदोलनकारी मंच के हरमोहन महतो और दीपक रंजीत ने मीडिया से साझा की. इस वार्ता में विस्थापितों की लंबित मांगों पर चर्चा की जायेगी और आगे का समाधान निकालने की पहल होगी.
विस्थापित टाटा कंपनी प्रबंधन से पुनर्वास, मुआवजा, नौकरी, विस्थापित प्रमाण पत्र, जमीन वापसी और 1996 के सर्वे खतियान को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. डिमना डैम के विस्थापितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है, और उनकी जमीनों पर अब भी कब्जा बरकरार है. इसके अलावा, विस्थापितों की पहचान भी अभी तक नहीं की गई है.
इन सभी मुद्दों का समाधान वार्ता के दौरान निकालने की उम्मीद जताई जा रही है. विस्थापितों को न्याय मिलने की पूरी संभावना है, और यह वार्ता उनके लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने टाटा कंपनी के लीज नवीकरण में विस्थापितों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग रखी है. मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि टाटा कंपनी के लीज नवीकरण में उद्योग, समाज सेवा, खेल, कला, संस्कृति कॉलम रखा गया है, लेकिन विस्थापितों को इस कमेटी में शामिल नहीं किया गया है. झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के एक प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को चाईबासा में कोल्हान के आयुक्त हरीश कुमार केशरी से मिलकर अपनी बातें रखी है.
