जमशेदपुर: जरूरतमंद मरीजों की मदद और मानव सेवा की भावना के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर ज्ञान रंजन श्रीवास्तव ने एक बार फिर रक्तदान के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कैंसर से पीड़ित एक मरीज की सहायता के लिए ब्लड सेंटर में बी-नेगेटिव (B-Negative) सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) दान किए।
ज्ञान रंजन श्रीवास्तव का यह 49वां रक्त अथवा रक्त घटक दान था। उनके इस योगदान की सराहना करते हुए ब्लड सेंटर के अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें सम्मानित किया।
कैंसर मरीज के लिए दान किए बी-नेगेटिव प्लेटलेट्स
आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल के कैंप ऑर्गेनाइजर और टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर ज्ञान रंजन श्रीवास्तव लंबे समय से रक्तदान एवं सामाजिक सेवा से जुड़े हुए हैं।
इस बार उन्होंने कैंसर पीड़ित मरीज की जरूरत को देखते हुए सिंगल डोनर प्लेटलेट्स दान किए। कैंसर के कुछ मरीजों में बीमारी या उपचार के कारण प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता पड़ती है।
विशेष रूप से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की उपलब्धता जरूरतमंद मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ब्लड सेंटर में मोमेंटो देकर किया सम्मानित
ज्ञान रंजन श्रीवास्तव के 49वें दान के अवसर पर ब्लड सेंटर के महाप्रबंधक संजय चौधरी, प्रतीक संघर्ष के अरिजीत सरकार और आनंद मार्ग से जुड़े सुनील आनंद ने उन्हें मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर उनके सेवा कार्यों की सराहना की गई और रक्तदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
रक्तदान सबसे बड़ा निष्काम कर्म : सुनील आनंद
आनंद मार्ग के सुनील आनंद ने कहा कि मानवता की सच्ची सेवा जरूरतमंद और पीड़ित लोगों की सहायता करने में है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए जीव-जंतुओं की बलि देने के बजाय उनके प्राणियों की सेवा करनी चाहिए। रक्तदान और प्लेटलेट्स दान ऐसे कार्य हैं, जिनमें व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता करता है।
सुनील आनंद ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि अस्पतालों में उपचार करा रहे मरीजों की पीड़ा कम करने के लिए किया गया रक्तदान निष्काम कर्म योग का उदाहरण है।
सिंगल डोनर प्लेटलेट्स दान की क्या है प्रक्रिया?
सिंगल डोनर प्लेटलेट्स दान को एसडीपी डोनेशन या प्लेटलेटफेरेसिस भी कहा जाता है। इसमें विशेष मशीन की सहायता से रक्त से प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं और शेष रक्त घटक दाता के शरीर में वापस पहुंचा दिए जाते हैं।
इस प्रक्रिया में आमतौर पर एक घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है। प्लेटलेट्स दान करने से पहले दाता की स्वास्थ्य जांच की जाती है। प्लेटलेट काउंट सहित अन्य चिकित्सकीय मानकों के आधार पर दान की पात्रता निर्धारित होती है।
आमतौर पर प्लेटलेट्स दान के लिए कम से कम 1.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर प्लेटलेट काउंट आवश्यक होता है। हालांकि, अंतिम निर्णय ब्लड सेंटर के चिकित्सक निर्धारित मानकों के अनुसार लेते हैं।
ज्ञान रंजन श्रीवास्तव का यह योगदान जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त और रक्त घटक दान करने के महत्व को रेखांकित करता है।
