Jamshedpur. वियतनाम में एक सड़क दुर्घटना में मारे गए झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों के पार्थिव शरीर शनिवार को राज्य में लाये गये. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. झारखंड प्रवासी प्रकोष्ठ की टीम प्रमुख शिखा लाकड़ा ने बताया कि दोनों के पार्थिव शरीर शनिवार दोपहर करीब एक बजे कोलकाता लाये गये और फिर राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई दो एंबुलेंस से उन्हें झारखंड लाया गया.

लाकड़ा ने कहा, ‘पार्थिव शरीर शनिवार शाम झारखंड पहुंचे. एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “मुख्यमंत्री के निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने पार्थिव शरीरों को झारखंड लाने के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया.” बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देशों पर श्रम विभाग ‘मुख्यमंत्री झारखंड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना’ के तहत दोनों मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा.

इससे पहले दोनों योग प्रशिक्षकों के पार्थिव शरीर मंगलवार रात तक कोलकाता लाये जाने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ कारणों से योजना में बदलाव करना पड़ा. अधिकारी ने बताया कि रांची के राजा कुमार (24) और जमशेदपुर के विनय कुमार राय (25) वियतनाम के दा लात शहर स्थित आदि योग अकादमी में योग सिखाते थे. उन्होंने बताया कि 25 सितंबर को उनके दोपहिया वाहन की एक कार से टक्कर हो गई थी, जिसमें दोनों की मौत हो गई थी. परिवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए शवों को वापस लाने में असमर्थता जताई थी. परिवार के सदस्यों ने बताया कि मृतकों के दोस्तों और वियतनाम में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों ने शवों को भारत लाने का खर्च जुटाने के लिए धन एकत्र किया.
अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार दोनों मृतकों के निकटतम परिजन को राज्य में पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देगी. राजा के पिता उमेश वर्मा एक बिजली मिस्त्री हैं. उन्होंने बताया कि उनका बेटा वियतनाम में काम करके परिवार का खर्च चला रहा था.
वर्मा ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा था, 25 सितंबर को हमें सूचना मिली कि हादसे में मेरे बेटे की मौत हो गई. वह दो-तीन महीने पहले रांची आया था. हम चाहते हैं कि उसका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द वापस लाया जाए. विनय के पिता रमेश राय ने कहा कि परिवार अपने बेटे का शव लाये जाने का इंतजार कर रहा है ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके. उन्होंने बताया कि विनय के दोस्तों और वियतनाम में रह रहे भारतीयों ने शव को लाने के लिए धन एकत्र किया. उनके पिता ने बताया कि विनय करीब दो साल पहले वियतनाम गया था.

