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JAMSHEDPUR NEWS: नवल टाटा हॉकी अकादमी के कैडेट आशीष तानी पूर्ति ने रचा इतिहास, मेन्स यूथ हॉकी 5s एशिया चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन

जमशेदपुर/रांची: झारखंड के खेल जगत और हॉकी प्रेमियों के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है। नवल टाटा हॉकी अकादमी (NTHA) के होनहार कैडेट आशीष तानी पूर्ति का चयन मस्कट (ओमान) में होने वाली आगामी ‘मेन्स यूथ हॉकी 5s एशिया चैंपियनशिप’ के लिए भारतीय टीम में आधिकारिक तौर पर कर लिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार दूसरी बड़ी उपलब्धि

आशीष के लिए भारत का प्रतिनिधित्व करने का यह दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय अवसर है। इससे पहले, उन्होंने जापान के काकामिगहारा में आयोजित अंडर-18 (U-18) एशिया कप में भारत की ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत में अहम भूमिका निभाई थी। सबसे खास बात यह है कि इस प्रतिष्ठित खाड़ी दौरे (Gulf Tour) के लिए लड़कों की टीम में झारखंड राज्य से चुने गए वे एकमात्र खिलाड़ी हैं।

कठिन प्रशिक्षण और हाई-इंटेंसिटी कैंप से मिली सफलता

मस्कट का टिकट हासिल करना आशीष के लिए आसान नहीं था। पंजाब विश्वविद्यालय में आयोजित अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और हाई-इंटेंसिटी वाले राष्ट्रीय तैयारी शिविर में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। चयनकर्ताओं के लिए 15 एलीट खिलाड़ियों में से 10 सदस्यीय टीम चुनना एक बड़ी चुनौती थी, विशेषकर ‘हॉकी 5s’ जैसे बेहद तेज़ और आक्रामक प्रारूप के लिए।

भारतीय डिफेंस की अहम जिम्मेदारी आशीष के कंधों पर

10 खिलाड़ियों की इस अंतिम टीम में कोचिंग स्टाफ ने बेहद सामरिक फुर्ती (Tactical Agility) पर जोर दिया है। पूरे स्क्वाड में केवल दो विशेषज्ञ डिफेंडरों को शामिल किया गया है, जो भारतीय रक्षापंक्ति को संभालेंगे। आशीष ने अपने शानदार खेल और धैर्य की बदौलत इन दो महत्वपूर्ण स्थानों में से एक पर अपना कब्ज़ा जमाया है।

ग्रामीण प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय मंच दे रहा HAF

आशीष की यह शानदार सफलता ‘हॉकी ऐस फाउंडेशन’ (HAF) के दूरदर्शी विजन का परिणाम है। टाटा स्टील और टाटा ट्रस्ट्स द्वारा 2017 में स्थापित यह फाउंडेशन झारखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हॉकी को पुनर्जीवित करने का काम कर रहा है। नवल टाटा हॉकी अकादमी (NTHA) के माध्यम से खिलाड़ियों को एफआईएच (FIH) स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर, अंतरराष्ट्रीय कोचिंग, विशेषज्ञ न्यूट्रिशनिस्ट और उन्नत खेल विज्ञान तकनीक प्रदान की जा रही है। इसी के परिणामस्वरूप झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवा सीधे विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं और भारत का मान बढ़ा रहे हैं।

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