Site icon Lahar Chakra

Migratory birds Jharkhand: पारा गिरने के साथ ही डिमना, चांडिल डैम समेत राज्य के जलाशयों में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू, हर साल आते हैं करीब 30,000 पक्षी

Ranchi. जमशेदपुर समेत झारखंड में पारा गिरने के साथ ही प्रवासी पक्षी जलाशयों की ओर रुख कर रहे हैं और अपनी चहचहाहट एवं रंगीन दृश्यों से पक्षी प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं. हर साल की तरह, इस बार भी हजारों प्रवासी पक्षी अपने मूल क्षेत्रों पर पड़ रहे अत्यधिक ठंड से बचने के लिए झारखंड को अपना शीतकालीन ठिकाना बना रहे हैं. ये पक्षी भोजन के लिए और मध्य एशिया, हिमालयी क्षेत्र, मंगोलिया और तिब्बती पठार में पड़ने वाली अत्यधिक ठंड से खुद को बचाने के लिए झारखंड में सर्दियों के मौसम के दौरान बांधों, झीलों, नदियों और अभयारण्यों जैसे विभिन्न जलाशयों में शरण लेते हैं.’

 उधवा झील पक्षी अभयारण्य (साहिबगंज), पतरातू बांध (रामगढ़), तोपचांची झील, तिलैया और मैथन बांध (धनबाद), कांके और रूक्का बांध (रांची), डिमना झील (जमशेदपुर), बास्का बांध (चतरा) और अन्य जल निकायों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है. उधवा अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थानों में से एक रहा है.  साहिबगंज जिले में स्थित इस 565 हेक्टेयर के अभयारण्य में गंगा नदी की दो प्राकृतिक अप्रवाही झीलें हैं, जिनमें पटौरा और बरहले शामिल हैं.

सर्दियों में सबसे ज्यादा आने वाले पक्षियों में काला धारीदार हंस, उत्तर धारीदार बत्तख, मुर्गाबी, कलहंस, गैडवॉल, गुरगल बत्तख और लाल चोंच एवं लाल कलगी वाली बत्तख शामिल हैं जबकि लाल अंजन, घोंघिल, लिटिल ग्रेब और कौड़िल्ला अभयारण्य की साल भर की पक्षी विविधता में योगदान करते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल लगभग 25,000 से 30,000 प्रवासी पक्षी राज्य के जलाशयों में आते हैं. वन विभाग ने प्रभागीय वन अधिकारियों को वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने को कहा है, जो जलाशयों में गतिविधियों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत वन अधिकारियों को सूचित करने के लिए भी कहा गया है.

Exit mobile version