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Jharkhand: मृत्युदंड, आजीवन कारावास  की सजा के खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, अदालत ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Ranchi. सुप्रीम कोर्ट उन दस दोषियों की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिनमें से छह को मौत की सजा सुनाई गई है. इन दोषियों ने कहा है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने दो-तीन साल पहले फैसला सुरक्षित रखने के बावजूद उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर फैसला अब तक नहीं सुनाया. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर दोषियों की याचिका पर जवाब तलब किया है. दोषियों की ओर से पेश वकील फौजिया शकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने निचली अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई सजा और उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसने 2022 और 2023 में दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

उन्होंने कहा कि 10 में से नौ दोषी रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में कैद हैं, जबकि एक दुमका स्थित केंद्रीय कारागार में बंद है. शकील ने शीर्ष अदालत के पिछले फैसलों के अनुरूप इसे सजा निलंबित करने का उचित मामला बताया. पीठ ने कहा कि सभी 10 मामलों में अपीलों की सुनवाई करने वाले उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक ही थे.

दोषियों ने दलील दी कि याचिकाकर्ता संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के असाधारण अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए बाध्य हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 21 से प्राप्त सभी अधिकारों की रक्षा हो.

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