Ranchi. झारखंड उच्च न्यायालय ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी को बुधवार को इस आधार पर बरी कर दिया कि उससे जिस भाषा में पूछताछ की गई, वह उसे नहीं समझता था। अभियोजन पक्ष ने उससे अंग्रेजी में सवाल पूछे थे, जिसे वह समझ नहीं पाया। न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सी. ओरांव नामक व्यक्ति की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई की। ओरांव ने रांची की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी थी।
ओरांव को 26 फरवरी, 2009 को परमेश्वरी देवी नामक महिला की हत्या का दोषी करार दिया गया था। आरोप था कि भूखंड पर कब्जे को लेकर हुए विवाद के कारण ओरांव ने परमेश्वरी देवी को कुएं में डुबोकर मार दिया था।
रांची की निचली अदालत ने 25 अप्रैल, 2018 को ओरांव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
इसके बाद, ओरांव ने उच्च न्यायालय में अपील की, जिस पर बुधवार को खंडपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने ओरांव से अंग्रेजी में सवाल पूछे थे, जबकि वह इस भाषा को नहीं समझता था।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने उसके सभी बयान अंग्रेजी में दर्ज किए थे, जबकि दोषी को अंग्रेजी समझ नहीं आती थी।
अदालत में बयान दर्ज किए जाने के बाद ओरांव ने उन पर अपने अंगूठे का निशान लगाया था। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की इस प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोपी का बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया केवल दिखावा लगती है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जब कोई आरोपी उस भाषा को नहीं समझता जिसमें अभियोजन पक्ष उससे सवाल पूछता है, तो उसके जवाब बचाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खंडपीठ ने यह भी कहा कि भारत का संविधान देश के सभी नागरिकों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देता है। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद व्यक्ति की दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द कर दिया।
