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Jharkhand Highcourt: पिछले 10 वर्षों से निर्मित पुलों के टूटने से संबंधित याचिका पर हाइकोर्ट सख्त, सचिव को जवाब दाखिल करने का दिया अंतिम अवसर

Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने पंकज कुमार यादव की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए 24 फरवरी 2026 तक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह जनहित याचिका झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पिछले 10 वर्षों से निर्मित पुलों के टूटने से संबंधित है। जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को जवाब दाखिल करना था।

कोर्ट ने कहा कि यदि ग्रामीण विकास विभाग के सचिव निर्धारित समय तक शपथ पत्र दाखिल नहीं करते है। तो संबंधित सचिव को व्यक्तिगत रूप से 10 हजार रुपे का जुर्माना प्रार्थी को देना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना राशि राज्य के खजाने से नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी चाहें तो 11 मार्च 2026 तक प्रत्युत्तर (rejoinder) दाखिल कर सकते हैं। हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एम।एस। सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अब तक संबंधित अधिकारियों ने शपथ पत्र दाखिल नहीं किया है।

कोर्ट ने उल्लेख किया कि 27 नवंबर 2025 को पहली बार मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को भी राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बावजूद शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी।

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