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Jharkhand Highcourt ने थाने में CCTV कैमरे के चालू हालत में न होने को लेकर DGP, गृह सचिव को किया तलब

Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने यहां एक पुलिस थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे के चालू हालत में नहीं होने को लेकर मंगलवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश होने का निर्देश दिया. यह मामला एक नाबालिग को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आया. फिरोज अंसारी नाम के व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके नाबालिग बेटे को 4 सितंबर को उठाए जाने के बाद डोरंडा पुलिस थाने में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था,

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अखिल कुमार की खंडपीठ ने अदालत के कई निर्देशों के बावजूद सीसीटीवी कैमरे के चालू हालत में नहीं होने को लेकर नाराजगी जताई. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अंसारी ने दावा किया कि उन्होंने अपने बेटे के नाबालिग होने का सबूत देने के लिए उसका जन्म प्रमाण पत्र पेश किया था, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर उसे लेने से इनकार कर दिया और उसकी उम्र 19 साल दर्ज की.

मंगलवार की सुनवाई के दौरान, पीठ ने डोरंडा पुलिस थाना प्रभारी को 4 सितंबर का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया. हालांकि, पुलिस अधिकारी ने अदालत को बताया कि पुलिस थाने के सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में नहीं थे. पीठ ने इस जानकारी पर नाराजगी जताई और कहा कि शहर के सभी पुलिस थानों, सड़कों और अहम स्थानों पर निगरानी कैमरे चालू हालत में रहने चाहिए. पीठ ने यह भी कहा कि पहले कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद, पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे अभी तक चालू नहीं किये गए हैं.

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, पीठ ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा और गृह सचिव वंदना डडेल को निर्देश दिया कि वे 12 अक्टूबर को – जो इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख है – वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश हों.

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