
रांची के सिल्ली थाना क्षेत्र के तीन बालू घाट अर्थात सुंडी बालू घाट,श्यामनगर बालू घाट तथा चोको सेरन बालू घाट के बालू संचालक पर बिना बालू सप्लाई किए सिर्फ चालान बेचने का आरोप हैं, जो जिला प्रशासन एवं झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के लिए जांच का विषय है.
स्थानीय लोग बताते हैं कि सिल्ली थाना क्षेत्र के सुंडी बालू घाट, जो झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के द्वारा संचालित है उस घाट में बालू है ही नहीं. इतना ही नहीं स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उक्त घाट पर आवागमन का कोई रास्ता भी नहीं है जिससे होकर ट्रैक्टर अथवा बड़े गाड़ी से बालू का उठाव हो सके. यहां चर्चा का विषय यह है कि ऐसे में किस प्रकार इस बालू घाट से बालू का चालान जारी किया जा रहा है?
वहीं दूसरी ओर सिल्ली थाना क्षेत्र के ही एक अन्य श्याम नगर का बालू घाट चर्चा में है, सूत्र बताते हैं कि उस घाट के खिलाफ पूर्व में किसी देवेंद्र महतो द्वारा आवाज उठाया गया था, जिसके बाद घाट संचालक एवं देवेंद्र महतो के बीच विवाद बढ़ने के बाद मामला केस में दर्ज हुआ और उसके बाद से वहां से भी बालू निकासी का कार्य ठप है.
इसके अलावा सिल्ली थाना क्षेत्र अंतर्गत तीसरा बालू घाट जो चोको सेरन बालू घाट हैं. सूत्र बताते हैं कि चोको सेरन बालू घाट पर ग्रामीणों के विरोध के कारण बालू का उठाव बंद है.
लहर चक्र संवाददाता द्वारा पता लगाया गया तो ज्ञात हुआ कि उपरोक्त तीन बालू घाट में से दो बालू घाट में विवाद बढ़ने पर बालू निकासी नहीं हो पा रहा है एवं तीसरे बालू घाट में बालू है ही नहीं, तो किस प्रकार लगभग 50 बालू के चालान सिली थाना क्षेत्र से प्रतिदिन काटे जा रहे हैं और बालू के चालान अगर इनके द्वारा नहीं काटे जा रहे है तो यहां ढोए जा रहे बालू कहां से उठ रहा है? यह जनहित में जांच का विषय है.
लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि सिल्ली थाना क्षेत्र के बालू घाट संचालक को बालू के साथ चालान मात्र ₹4000 में दिया जाना चाहिए था, पर यहां के बालू घाट संचालक द्वारा सिर्फ चालान का लगभग ₹12000 वसूला जा रहा है.
अर्थात बिना बालू आपूर्ति किए ही मात्र चालान दिए जाने के एवज में बालू घाट संचालकों द्वारा ₹12000 वसूले जाने की चर्चा है,जो जांच का विषय है.
स्थानीय लोगों के माने तो उपरोक्त तीनों बालू घाट के संचालक का जिला प्रशासन समेत झारखंड राज्य खनिज विकास निगम में अच्छी पैठ होने की बात बताई जाती है.
स्थानीय लोगों की भी माने तो बिना सरकारी पदाधिकारी के संरक्षण का इस प्रकार बालू का अवैध कारोबार नहीं चल सकता है.
अवैध बालू के कारोबार पर विधानसभा में तरह-तरह की सवाल उठाए जाते हैं पर बालू माफिया पर तनिक भी इसका असर नहीं पड़ पा रहा है, और बालू माफिया बेधड़क नेशनल हाईवे समेत अन्य सड़कों पर अवैध बालू वाहन दौड़ाते देखे जाते हैं.
वहीं दूसरी ओर अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की रोकथाम के लिए गढ़वा जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त शेखर जमुआर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फ़ोर्स की बैठक 24 मार्च को हुई. इसमें पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार पाण्डेय,अपर समाहर्ता राज महेश्वरम,अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा संजय कुमार, डीएसपी यशोधरा, एसडीपीओ नीरज कुमार, जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव समेत कई वरीय पदाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों ने भाग लिया.
वर्चुअल रूप से अनुमंडल पदाधिकारी रंका रूद्र प्रताप, जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी एवं सभी थाना प्रभारियों ने भी भाग लिया.
उक्त बैठक में गढ़वा उपायुक्त ने कहा कि जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण से संबंधित शिकायत पर त्वरित मामले की गहन जांच कर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई करें. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा. सभी संबंधित पदाधिकारी एवं थाना प्रभारी को सतत निगरानी रखते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया.
गढ़वा के जिला उपायुक्त ने अवैध रूप से बालू ढुलाई की सूचना पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया. उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी थाना प्रभारी को वैध बालू ढुलाई को नहीं रोकने का निर्देश दिया. निर्गत रसीद देखने को कहा गया. रात के समय पैनी नजर रखते हुए अवैध ढुलाई पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया. साथ ही रात में बालू ढुलाई के लिए चालान निर्गत नहीं करने के आदेश दिए गए. विभिन्न स्थानों पर चेकपोस्ट आदि के माध्यम से भी इसकी जांच करने को कहा गया.
अब देखना है कि रांची जिला प्रशासन एवं झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के द्वारा गढ़वा जिला प्रशासन के कार्रवाई के तर्ज पर रांची जिले के तमाम बालू घाट के द्वारा किए जा रहे अवैध कारोबार के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई कर पाती है अथवा नहीं.
Kumar Manish,9852225588