
Ranchi. झारखंड में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर की दरार और गहरी हो गई है। ‘क्रॉस-वोटिंग’ के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने बृहस्पतिवार को झारखंड की दो राज्यसभा सीट में से एक पर कांग्रेस के प्रणव झा को हराकर जीत दर्ज की। दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम निर्वाचित हुए।
कांग्रेस ने राजद (राष्ट्रीय जनता दल) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन पर विश्वासघात का आरोप लगाया है, जबकि राजद ने झारखंड कांग्रेस प्रभारी को ‘बिकाऊ’ कहा है। पूरा गठबंधन केवल एक ही साझा कार्यक्रम पर चल रहा है, और वह है लूट और भ्रष्टाचार।’’कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने राजद और भाकपा (माले) लिबरेशन पर ‘‘विश्वासघात’’ का आरोप लगाया था। इसके जवाब में, राजद ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए, जबकि भाकपा (माले) लिबरेशन ने भी इन आरोपों की कड़ी निंदा की।
झारखंड सरकार में राजद के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि राजद और भाकपा (माले) लिबरेशन को बदनाम किया जा रहा है, जबकि कांग्रेस इस चुनाव में अपने खुद के विधायकों के वोट हासिल करने में भी नाकाम रही। संजय प्रसाद यादव ने आरोप लगाया, ‘‘हाल में बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विधायक भाजपा के पक्ष में मतदान करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे। अब, वे विश्वासघात के आरोप लगा रहे हैं। ऐसा करना राजद के खून में नहीं है।’’
इस चुनाव में नाथवानी को 28 मत मिले जबकि झा को केवल 20 मतों से संतोष करना पड़ा। वहीं, झामुमो के राम को 30 मत प्राप्त हुए, जबकि तीन वोट अमान्य घोषित कर दिए गए जिनमें दो भाजपा के और एक कांग्रेस का था। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं कांग्रेस झारखंड प्रभारी के. राजू के आरोपों की निंदा करता हूं और सुझाव देता हूं कि पार्टी आत्मनिरीक्षण करे। मैं पार्टी का पोलिंग एजेंट था।
मतदान के बाद, मैंने अपने पार्टी आलाकमान और झारखंड के मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया था कि राजद के सभी चार वोट कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में पड़े थे। यह निराधार आरोप पार्टी (कांग्रेस) की अपनी गलतियों को छिपाने के लिए लगाया गया है।’’ भाकपा (माले) लिबरेशन के राज्य सचिव मनोज भक्त ने भी कहा कि पार्टी के दोनों विधायकों ने ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में ही अपना वोट डाला था। उन्होंने आरोप लगाया, यह कांग्रेस है, जो अपने विधायकों को संभाल नहीं सकी। कांग्रेस का बिकाऊ होने का पुराना इतिहास रहा है।’’
