
Ranchi. झारखंड के गिरिडीह में शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने की कोशिश करते समय भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। उन्होंने बताया कि भाजपा के 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि करीब 90 अन्य कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी। इधर, रांची में पुलिस और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के बीच हुई झड़प के सिलसिले में शनिवार को 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ कम से कम तीन प्राथमिकी दर्ज की गईं।
ये प्राथमिकी सरकारी कामकाज में कथित तौर पर बाधा डालने और पुलिस के साथ झड़प करने के आरोप में रांची के कोतवाली थाने में दर्ज की गईं। रांची के पुलिस अधीक्षक (सिटी) पारस राणा ने कहा, ‘‘शुक्रवार को हुई झड़प के सिलसिले में कोतवाली थाने में 14 नामजद आरोपियों और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।’’
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि तीन में से एक प्राथमिकी पुलिस ने कथित उपद्रवियों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और निर्धारित मार्ग से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में दर्ज की है। अधिकारी ने बताया कि दो अन्य प्राथमिकी दो व्यक्तियों द्वारा दर्ज करायी गई हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने आरोप लगाया कि एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाने वाली महिला अमीषा प्रसाद को शुक्रवार के आंदोलन में भाग लेने के कारण पुलिस ने हिरासत में लिया और कोतवाली थाने लायी।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, रांची की महापौर रोशनी खलखो, भाजपा विधायक सी. पी. सिंह और अन्य नेता कोतवाली थाने पहुंचे और करीब तीन घंटे तक वहां रहे। मरांडी ने कहा,‘यह झारखंड पुलिस की गुंडागर्दी का एक उदाहरण है। जिस तरह से पुलिस ने महिला को हिरासत में लिया, उससे साफ तौर पर लगता है कि उसे प्रताड़ित किया गया। सरकार लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस सरकार को पता होना चाहिए कि आप जितना आवाज दबाने की कोशिश करेंगे, वह उतनी ही बुलंद होगी।’’
मरांडी ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को पुतला दहन जुलूस के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ झारखंड सरकार के ‘‘गुंडों’’ और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) कार्यकर्ताओं ने जिस तरह का व्यवहार किया, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अगर महिला के खिलाफ पहले से कोई मामला दर्ज था, तो पुलिस को उसे नोटिस देना चाहिए था, न कि आंदोलन में शामिल होने के बाद उसे हिरासत में लेकर थाने लाना चाहिए था। पुलिस अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करके उन्हें हिरासत में ले रही है, जबकि झामुमो कार्यकर्ताओं को संरक्षण दे रही है।’’
हालांकि, पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि महिला को शुक्रवार की झड़प के सिलसिले में हिरासत में नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘हम उसे करीब दो महीने पहले सदर थाने में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले के सिलसिले में थाने लाए।’’
अधिकारियों के अनुसार, झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच शुक्रवार को रांची में झड़प हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने की कोशिश की थी।
