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Jharkhand : पहला अनुपूरक बजट आज होगा पेश, अतिवृष्टि सहित इन मुद्दों पर होगी तकरार

रांची. झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र अपने दूसरे दिन सोमवार चार अगस्त को और गहमागहमी के साथ शुरू होने जा रहा है. पहले दिन प्रश्नकाल के बाद चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर पेश करेंगे. इसके बाद इस पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना है.

सत्र के पहले दिन की कार्यवाही में शोक प्रस्ताव के बाद स्थगन हुआ था, लेकिन अब सदन में गर्मागर्म बहस का माहौल बन रहा है. हालांकि सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें सत्र के सुचारू संचालन की रणनीति बनी.

इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित कई वरिष्ठ विधायकों ने हिस्सा लिया था. अनुपूरक बजट में अतिरिक्त व्यय को मंजूरी मिलेगी, जिस पर विपक्ष द्वारा सवाल खड़े करने की पूरी संभावना है.

इन मुद्दों पर होगा वार-पलटवार

भाजपा ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अतिवृष्टि से हुए नुकसान, सरना धार्मिक कोड और ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी.

इसके अलावा, बिहार में चल रहे विशेष पहचान रजिस्टर (SIR) के खिलाफ झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की योजना भी चर्चा में है. मरांडी ने कहा है कि हम सरकार से जनता के हित में जवाब चाहते हैं. फंड की कमी का बहाना अब नहीं चलेगा.

दूसरी ओर सत्ता पक्ष भी पूरी तैयारी में है. संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि सरकार विपक्ष के हर सवाल का तार्किक जवाब देगी. उन्होंने कहा कि हम जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं. विपक्ष को केवल हंगामा करने की बजाय रचनात्मक सुझाव देने चाहिए.

हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अभी दिल्ली में शिबू सोरेन की देखभाल में लगे हैं. उनकी विधानसभा में उपस्थिति पर संशय है. ऐसा हुआ तो झारखंड मुक्ति मोर्चा की सेकेंड लाइन मोर्चा संभालेगी.

अतिवृष्टि पर चर्चा कराएगी सरकार

सत्र में राज्य में अतिवृष्टि से हुए नुकसान पर विशेष चर्चा होगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही भारी बारिश को गंभीरता से लेने की बात कही थी और सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का दावा कर रही है. लेकिन विपक्ष का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में राहत कार्यों में देरी और फंड की कमी सरकार की नाकामी को दर्शाती है.

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