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Kavach Train Protection System :भारतीय रेल ने तीन सेक्शन में 163 km चालू करके कवच 4.0 सेफ्टी रोलआउट में तेज़ी लाई

हाजीपुर –

भारतीय रेल ने आज अपने नेटवर्क के तीन सेक्शन में कवच वर्जन 4.0 (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के 163 रूट किलोमीटर चालू किए, जो रेल सेफ्टी को मज़बूत करने में एक और बड़ा मील का पत्थर है। नए चालू किए गए सेक्शन में धनबाद और पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के सरमाटांर से निमियाघाट (76 km), फ्लाईओवर केबिन से भभुआ रोड (43 km) और सासाराम से फेसर (44 km) सेक्शन शामिल हैं। पूर्व मध्यि रेल के दीन दयाल उपाध्याय मंडल में कवच सिस्टम को शामिल किया गया है। इस कमीशनिंग के साथ, इंडियन रेलवे हाई-डेंसिटी रूट पर ट्रेन प्रोटेक्शन, ऑपरेशनल सेफ्टी और रिलायबिलिटी बढ़ाने के लिए स्वदेशी कवच सिस्टम के डिप्लॉयमेंट में तेज़ी ला रहा है।

आज के शामिल होने के बाद, कवच वर्जन 4.0 को पूर्व मध्य रेल में कुल 256.3 रूट किलोमीटर पर कमीशन किया गया है। इसमें पूर्व मध्य रेल का मानपुर-सरमाटांर (93.3 Km) सेक्शन भी शामिल है।

पूर्व मध्य रेल पर कवच 4.0 की कार्यान्वयन की प्रगति –

पूर्व मध्य रेल के धनबाद और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल के सरमाटांर से निमियाघाट, फ्लाईओवर केबिन से भभुआ रोड और सासाराम से फेसर के लेटेस्ट कमीशन किए गए 163 रूटकिमी सेक्शन पर कवच 4.0 के साथ ट्रेन ऑपरेशन शुरू हो गया है। फेसर-सासराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस सफलतापूर्वक चलायी गयी । यह फेसर से 03:02 बजे गुजरी और सासाराम 03:50 बजे पहुंची । भभुआ-पंडित दीन दयाल उपाध्याय/फ्लाईओवर केबिन सेक्शन पर यह भभुआ से 04:39 बजे निकली और पंडित दीन दयाल उपाध्याय/एफओसी से 05.20 बजे गुजरी।
कवच को पूर्व मध्य रेल के 4,238 रूट किलोमीटर पर लगाया जा रहा है, जिसमें पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन-प्रधानखंटा सेक्शन पर 417 रूट किलोमीटर शामिल हैं। यह दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड ट्रंक रूट का एक ज़रूरी हिस्सा है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुज़रता है। इस सेक्शन पर यात्री यातायात एवं माल गाडि़यों को मिला जुला ट्रैफिक है और वर्तमान में यहाँ 130 किमी प्रति घंटे की गति की अनुमति है।

कवच के बारे में संक्षिप्त विवरण –

कवच वर्ज़न 4.0, भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का नवीनतम और सबसे उन्नत संस्करण है। इसे परिचालन फीडबैक और स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों के आधार पर निरंतर तकनीकी अपग्रेड के माध्यम से विकसित किया गया है। अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा अनुमोदित, कवच 4.0 रेलवे सुरक्षा में एक बड़ी प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।

इसे विशेष रूप से भारत के विविध, उच्च-घनत्व और मल्टी-लाइन रेल नेटवर्क की परिचालन मांगों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो बेहतर विश्वसनीयता, त्वरित प्रतिक्रिया और मौजूदा सिग्नलिंग एवं इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सहज एकीकरण प्रदान करता है। वैश्विक सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए एक स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता (आईएसए) द्वारा प्रमाणित, कवच 4.0 भारतीय रेलवे में बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए पूरी तरह तैयार है।
कवच सुरक्षित ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने के लिए माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और रेडियो संचार प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। जब एक पूर्व-निर्धारित दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता चलता है, तो यह सिस्टम लोको पायलट को सचेत करता है और आवश्यकता पड़ने पर ऑनबोर्ड उपकरणों के माध्यम से स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है।

कवच सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी) के खिलाफ स्वचालित सुरक्षा प्रदान करता है और साइड, आमने-सामने और पीछे से होने वाली टक्करों को प्रभावी ढंग से रोकता है। यह निरंतर ओवरस्पीडिंग की निगरानी और नियंत्रण भी करता है, जिससे कम दृश्यता और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त, यह सिस्टम गलत दिशा और रिवर्स मूवमेंट के दौरान अलर्ट जारी करता है और लेवल क्रॉसिंग गेटों के बारे में स्वचालित जानकारी प्रदान करता है।

कवच एसआईएल-4 सुरक्षा मानकों का पालन करता है, जो वैश्विक स्तर पर सुरक्षा अखंडता का उच्चतम स्तर है। एक स्वदेशी रूप से डिजाइन और लागत प्रभावी प्रणाली होने के नाते, यह आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता को कम करता है और भारतीय सिग्नलिंग उद्योग को बढ़ावा देता है।
भारतीय रेलवे निरंतर कवच के दायरे का विस्तार कर रहा है, जो सुरक्षित एवं विश्वसनीय ट्रेन परिचालन और लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित रेल यात्रा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। यह कमीशनिंग एक अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की ओर एक और कदम है।

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