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Khaleda Zia: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन, पीएम मोदी ने 2015 में मुलाकात की तस्वीर पोस्ट कर जताया शोक

Dhaka. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और शेख हसीना की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनकी राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक जताया, सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के ढाका में निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ. खालिदा जिया के परिवार और बांग्लादेश के सभी लोगों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदनाएं. बांग्लादेश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों में जिया के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. मोदी ने 2015 में जिया से हुई अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि उनका दृष्टिकोण और विरासत हमारी साझेदारी को आगे भी मार्गदर्शन देती रहेगी.

खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच दशकों चली प्रतिद्वंद्विता ने एक पीढ़ी तक बांग्लादेश की राजनीति को परिभाषित किया. जिया पर कई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज थे, जिन्हें उन्होंने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था. जनवरी 2025 में उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ अंतिम भ्रष्टाचार मामले में उन्हें बरी कर दिया था, जिससे फरवरी में होने वाले चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ हो गया था.
वह ब्रिटेन में इलाज कराने के बाद मई में स्वदेश लौटी थीं. इससे पहले जनवरी की शुरुआत में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी थी, जबकि शेख हसीना की सरकार ने इससे पहले कम से कम 18 बार उनके अनुरोधों को खारिज किया था.

पिछले कई दिनों से जिया की तबियत बहुत खराब थी। देर रात आई खबरों में उनके चिकित्सकों के हवाले से बताया गया था कि जिया की हालत और बिगड़ जाने की वजह से उन्हें राजधानी के एक विशेष निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. खालिदा जिया का विवाह देश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान से हुआ था, जिनकी 1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद जिया ने सैन्य तानाशाही के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप 1990 में तानाशाही का पतन हुआ. जिया ने 1991 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला और 2001 से एक बार फिर इस पद पर रहीं. उन चुनावों में और इसके बाद कई चुनावों में उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना रहीं.

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