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Land For Job Scam: लालू प्रसाद के खिलाफ निचली अदालत में कार्यवाही पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई के जमीन के बदले नौकरी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर सुनवाई में तेजी लाने को कहा. शीर्ष अदालत ने मामले में यादव को स्वास्थ्य आधार पर निचली अदालत में पेशी से छूट भी प्रदान की.

पीठ ने कहा, मामले के तथ्य और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम आगे यह आदेश पारित करने के लिए इच्छुक हैं कि वह चाहें तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हों. हम उच्च न्यायालय से सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह करते हैं.

राजद अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत कोई पूर्वानुमति नहीं ली है. सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि वर्तमान मामले में अनुमति की आवश्यकता नहीं है. सिब्बल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए (लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले पूर्वानुमति) के तहत सीबीआई से कोई पूर्वानुमति न लेने का हवाला देते हुए सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की.

गत 29 मई को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है.उच्च न्यायालय ने एजेंसी की प्राथमिकी रद्द करने की यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया और सुनवाई 12 अगस्त के लिए स्थगित कर दी.
यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप ‘डी’ की नियुक्तियों से संबंधित है. ये नियुक्तियां कथित तौर पर राजद अध्यक्ष के परिवार या सहयोगियों के नाम पर उपहार में दी गई या हस्तांतरित की गई जमीन के बदले में की गई थीं.

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