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29 जून को आयोजित तकनीकी सत्र में श्री सिंह ने लगभग 10–12 मिनट की पॉवरप्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि किस प्रकार जॉयफूल लर्निंग, एक्टिविटी – बेस्ड लर्निंग, स्थानीय संसाधनों, खेल, कला, कहानी, गणितीय गतिविधियों तथा विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी, आनंददायक एवं स्थायी बनाया जा सकता है। प्रस्तुति के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने उनके नवाचार की सराहना की तथा इसे विद्यालयी शिक्षा में व्यवहारिक एवं उपयोगी पहल बताया।
गौरतलब है कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के विभिन्न राज्यों से 31चयनित नवाचारी शिक्षकों एवं शिक्षक-शिक्षा संस्थानों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इनमें झारखंड से केवल मनोज कुमार सिंह का चयन हुआ, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। चयनित प्रतिभागी को नगद राशि भी दिये गए।
श्री सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि झारखंड के शिक्षकों की नवाचारी सोच, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच से प्राप्त अनुभव एवं सुझावों का उपयोग राज्य के विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम को और अधिक प्रभावी बनाने में किया जाएगा।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार, सहकर्मी शिक्षकों का भी कार्य योजना पुरी करने में बहुत योगदान रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री सिंह को बधाई दी और इसे झारखंड की विद्यालयी शिक्षा के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।