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KIIT में एक और नेपाली छात्रा की मौत, छात्रावास के कमरे में बरामद किया गया शव, हिमालयी देश भारत सरकार के संपर्क में

Bhuvaneshvar. नेपाल ने ओडिशा के भुवनेश्वर एक प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थान में पढ़ने वाली अपने यहां की एक छात्रा की मौत की जांच के लिए कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है. हिमालयी देश के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी. नेपाली मूल की 18 वर्षीय छात्रा का शव बृहस्पतिवार को कलिंगा औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान (केआईआईटी) के छात्रावास स्थित उसके कमरे में बरामद किया गया. वह यहां बीटेक कंप्यूटर साइंस की छात्रा थी.
इसी संस्थान की एक अन्य नेपाली छात्रा प्रकृति लामसाल ने 16 फरवरी को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी और इसके करीब ढाई महीने बाद यह घटना हुई है. नेपाल की विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत के ओडिशा में केआईआईटी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली नेपाली छात्रा प्रिसा साह अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गईं। इस घटना ने हमें बहुत दुखी कर दिया है. मैं प्रिसा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करती हूं और इस दुखद घड़ी में उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.
उन्होंने कहा, ‘‘घटना के तुरंत बाद, विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार, ओडिशा सरकार और दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास के उच्च पदस्थ अधिकारियों के माध्यम से घटना के सही कारणों की जांच के लिए कूटनीतिक पहल शुरू की है.
भारत में नेपाल के राजदूत शंकर पी. शर्मा ने कहा कि अधिकारी गहन जांच के लिए विदेश मंत्रालय, ओडिशा सरकार, पुलिस और विश्वविद्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं. पुलिस आयुक्त एस. देव दत्ता सिंह ने बताया, ‘नेपाल निवासी एक छात्रा का शव बरामद किया गया है और ऐसा प्रतीत होता है कि उसने केआईआईटी के छात्रावास में आत्महत्या की है.
छात्रावास का दौरा करने वाले पुलिस आयुक्त ने यह भी कहा कि अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है. यहां एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘यह घटना उसी छात्रावास और उसी मंजिल में हुई है. हालांकि, पुलिस को मृतका के पास से कोई ‘सुसाइड नोट’ बरामद नहीं हुआ है.
ओडिशा सरकार ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है. इससे पहले फरवरी में नेपाली छात्रा प्रकृति लामसाल की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. उस समय ऐसी खबरें आई थीं कि पीड़िता को कथित तौर पर ‘ब्लैकमेल’ किया गया था और निजी विश्वविद्यालय के प्राधिकारियों से न्याय न मिलने के कारण उसने अपनी जान दे दी.
नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर उठाया था और केंद्र सरकार से संस्थान के नेपाली छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया था.
ओडिशा सरकार ने मामले की जांच के लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी. एनएचआरसी ने भी घटना की जांच की.
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