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घरेलू व औद्योगिक वायरिंग पर NIT Jamshedpur की पहल, 58 छात्रों ने लिया हिस्सा

जमशेदपुर।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), जमशेदपुर के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 5 दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला का शुभारंभ 7 जुलाई से किया गया है। कार्यशाला का विषय “विद्युत वायरिंग : घरेलू और औद्योगिक अनुप्रयोग” रखा गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को वायरिंग की व्यावहारिक तकनीकों एवं औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन NIT के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार ने किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि “तकनीकी शिक्षा का असली मूल्य तभी है जब वह व्यावहारिक जीवन में उपयोगी हो।” उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद भी किया, जिससे छात्रों का उत्साह दोगुना हो गया।

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प्रो. (डॉ.) सतीश कुमार, डीन (R&C), ने छात्रों को नवाचार और कौशल विकास के प्रति प्रेरित किया। पूरे कार्यक्रम का तकनीकी निर्देशन डॉ. सुप्रियो दास ने किया, जिन्होंने कार्यशाला को व्यावहारिक और दक्षतापूर्ण बनाने में अहम भूमिका निभाई।

कार्यक्रम की संयोजन समिति में डॉ. आलोक प्रियदर्शी, डॉ. अन्नयो भट्टाचार्य और डॉ. कुंदन कुमार शामिल रहे, जबकि तकनीकी समन्वयन की जिम्मेदारी डॉ. रवि भूषण और डॉ. शुभांशु कुमार तिवारी ने संभाली। उनकी मेहनत और योजना के कारण कार्यशाला में झारखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से भी छात्र पहुंचे।

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यहाँ इंडो डैनिश टूल रूम और पॉलीटेक्निक संस्थानों से भी छात्र शामिल हुए। कुल 58 छात्रों ने कार्यशाला में पंजीकरण कराया है।कार्यशाला की सफलता में पीएचडी शोधार्थियों जैसे अभिषेक कुमार सिन्हा, रंजन कुमार, आनंद कुमार, अमित आर्यन और अमित भारती का योगदान विशेष रहा। इन्होंने तकनीकी सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑन-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन को बखूबी संभाला। इसके साथ-साथ द्वितीय वर्ष की छात्रा रोशनी कुमारी ने भी आयोजन के सुचारू संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाई, जो बेहद सराहनीय रही।

NIT जमशेदपुर का यह कदम छात्रों को आत्मनिर्भर, इंडस्ट्री-रेडी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल मानी जा रही है। कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को वायरिंग के सिद्धांत ही नहीं, बल्कि असली दुनिया की चुनौतियों से रूबरू होने का अवसर भी मिला।

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