
Ranchi. सीएम हेमंत सोरेन ने नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग शासी परिषद की बैठक में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने राज्य व केंद्र के बीच राजस्व बंटवारे पर भी सुझाव दिया. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में खनिज और कोयले के साथ अन्य खनिजों की बहुतायत है. खनन में प्रदूषण और विस्थापन बड़ा कारक रहा है. खनन कंपनियों द्वारा ली गई भूमि (नॉन पेमेंट ऑफ लैंड कंपनसेशन) के एवज में राज्य सरकार का 1,40,435 करोड़ रुपये बकाया जल्द दिलाया जाये. उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने संघीय व्यवस्था में केंद्र व राज्य सरकारों के बीच राजस्व के बंटवारे के संदर्भ में आवश्यक प्रक्रिया बनायी है. बैठक में राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना विकसित गांव से साकार होती है. विकसित भारत की मूल परिकल्पना का केंद्र गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तीकरण, युवा कौशल, किसानों का विकास, पूर्ण शिक्षा, आर्थिक, आधारभूत संरचना एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में सतत विकास है.
सोरेन ने उग्रवाद से निपटने के लिए सीएपीएफ की प्रतिनियुक्ति के लिए राज्य सरकारों पर पड़नेवाले वित्तीय भार को पूर्ण रूप से खत्म करने की जरूरत बतायी. कहा कि वर्ष 2014 में झारखंड के 16 जिले नक्सल प्रभावित थे. लेकिन, अब नक्सल राज्य के दो जिलों पश्चिमी सिंहभूम व लातेहार तक सिमट गया है. बावजूद इसके विशेष केंद्रीय सहायता झारखंड के सभी 16 जिले में लागू रखने की आवश्यकता है. श्री सोरेन ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान बाहर काम करनेवाले झारखंड के मजदूरों को राज्य सरकार ने सहायता प्रदान की. हाल ही में कैमरून में फंसे मजदूरों को राज्य सरकार ने अपने खर्च से वापस बुलाया. दूसरे देश में काम करने के इच्छुक मजदूरों के वीजा, सुरक्षा और व्यय में केंद्र सरकार की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.
