
New Delhi. डिजिटल भुगतान मंच फोनपे ने स्पष्ट किया है कि निष्क्रिय पड़े वॉलेट पर लगने वाले ‘इनएक्टिविटी शुल्क’ का उपभोक्ताओं के लिंक किए गए बैंक खातों या यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने यह स्पष्टीकरण कुछ ग्राहकों को भेजी गई सूचनाओं के बाद जारी किया, जिनसे डिजिटल वॉलेट और यूपीआई के संचालन को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।
कंपनी ने कहा कि यह शुल्क केवल फोनपे वॉलेट पर लागू होता है, जो एक प्रीपेड भुगतान साधन (पीपीआई) है। इसका संबंध यूपीआई भुगतान से नहीं है, जहां राशि सीधे उपयोगकर्ता के बैंक खाते से कटती है। फोनपे के अनुसार, कई उपभोक्ता फोनपे खाते, यूपीआई खाते और फोनपे वॉलेट को एक ही सेवा मानते हैं, जबकि ये अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं और इन पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी उपयोगकर्ता के वॉलेट में पर्याप्त शेष राशि नहीं है, तो निष्क्रियता शुल्क उसके बैंक खाते या यूपीआई के माध्यम से नहीं वसूला जाएगा। कुछ ग्राहकों ने यह सवाल भी उठाया कि वे नियमित रूप से फोनपे ऐप का उपयोग करते हैं, फिर भी उन्हें निष्क्रियता संबंधी सूचना क्यों मिली। इस पर कंपनी ने कहा कि वॉलेट गतिविधि और यूपीआई गतिविधि को अलग-अलग दर्ज किया जाता है।
ऐसे में कोई ग्राहक क्यूआर कोड भुगतान, धन हस्तांतरण या बिल भुगतान के लिए नियमित रूप से यूपीआई का उपयोग करता रहे, फिर भी उसका वॉलेट लंबे समय तक उपयोग नहीं होने पर निष्क्रिय माना जा सकता है।
कंपनी के अनुसार, किसी वॉलेट से निष्क्रियता शुल्क काटने से 15 दिन पहले उपयोगकर्ता को सूचना भेजी जाती है। इस अवधि में ग्राहक वॉलेट को फिर से सक्रिय कर सकता है, उसमें धनराशि जोड़ सकता है, पात्र शेष राशि निकाल सकता है या वॉलेट बंद कर सकता है। फोनपे ने यह भी स्पष्ट किया कि वॉलेट को पुनः सक्रिय करने के लिए पूर्ण ‘केवाईसी’ कराना आवश्यक नहीं है। सामान्य तौर पर ओटीपी सत्यापन और वॉलेट के माध्यम से एक लेनदेन कर इसे सक्रिय किया जा सकता है।
कंपनी ने कहा कि कैशबैक को लेकर भी उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति है। आमतौर पर कैशबैक राशि फोनपे वॉलेट में जमा नहीं होती, बल्कि अलग ‘गिफ्ट कार्ड बैलेंस’ में जमा की जाती है। इसलिए कैशबैक प्राप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि वॉलेट सक्रिय है या उस राशि पर निष्क्रियता शुल्क लागू होगा।
