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PM Modi Vs Rahul gandhi: मोहब्बत की दुकान’ की बात करने वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगा रहे, पीएम मोदी के आरोप पर राहुल का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री ने झूठ की शरण ली

New Delhi प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दल लगातार मिली चुनावी हार को पचा नहीं पा रहा है और उनके प्रति गहरी नफरत रखने के बावजूद वह कभी उनकी कब्र नहीं खोद पाएगा क्योंकि करोड़ों भारतीयों का आशीर्वाद उनका कवच है। राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्षी दल द्वारा डाले गए व्यवधान पर खेद जताया और कहा कि यह न केवल एक आदिवासी और महिला राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि उनके सर्वोच्च संवैधानिक पद और भारत के संविधान का भी अपमान है। मोदी ने कहा कि उन्हें संविधान के बारे में बात करने का कोई हक नहीं है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर राहुल गांधी की ‘गद्दार’ टिप्पणी की भी निंदा की और इसे पूरे सिख समुदाय का अपमान बताया और कहा कि यह सिखों के प्रति कांग्रेस की नफरत को दिखाता है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपमानित करना कांग्रेस की संस्कृति का हिस्सा है। अपने करीब 100 मिनट के भाषण में, मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और कहा कि वह देश के विकास के लिए कोई दृष्टि देने में विफल रही, और केवल ‘शाही परिवार’ के हितों की सेवा करते हुए अपने खजाने भरती रही। उन्होंने कहा कि 2014 में उनके सत्ता में आने के बाद से संसद का एक भी सत्र ऐसा नहीं रहा ‘जब मोदी को गाली न दी गई हो।’

उन्होंने कहा कि अगर कोई उनसे उनकी सेहत के राज में पूछता, तो वह जवाब देते कि ‘मैं रोज दो किलो गालियां खाता हूं।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने सवाल किया, आप मोदी की कब्र क्यों खोदना चाहते हैं? यह सिर्फ एक नारा नहीं है। यह उनके भीतर छिपी नफरत का प्रतिबिंब है।”

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आरोप
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए झूठ की शरण ली, क्योंकि वह (मोदी) सच्चाई से डर गए। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘बस सवालों से इतनी घबराहट? मोदी जी सच्चाई से ऐसा डरे (कि) झूठ की शरण ले ली। खैर, जो उचित समझा, (उन्होंने) वही किया।’’

नेता प्रतिपक्ष, पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देकर चीन के साथ सैन्य तनाव का विषय लोकसभा में उठाना चाहते थे, लेकिन आसन से अनुमति नहीं मिली। इस कारण चार दिनों से निचले सदन में गतिरोध बना हुआ है और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पारित हुआ।

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