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Prashant Kishor: प्रशांत किशोर बने विधायक, बांकीपुर से ऐतिहासिक जीत के बाद बोले-भाजपा, राजद या कांग्रेस से नहीं होगा गठबंधन, जनता ही हमारी सहयोगी

Patna जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी जीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे दलों के असंतुष्ट समर्थकों के सहयोग से संभव हुई। किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों से हराने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही। बांकीपुर विधानसभा सीट पर 1995 से भाजपा लगातार जीत दर्ज करती रही थी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह अब अकेले चुनाव लड़ने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करेंगे, किशोर ने कहा, ”हम किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। हमारा गठबंधन बिहार की जनता के साथ होगा।

आपने देखा कि बांकीपुर की जनता ने स्थापित राजनीतिक दलों को छोड़कर हमें समर्थन दिया है। इस जीत के साथ जन सुराज पार्टी को बिहार विधानसभा में पहली बार प्रतिनिधित्व मिलेगा। किशोर ने कहा, ”मैं आम नागरिकों के साथ-साथ उन लोगों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने जन सुराज के सदस्य नहीं होने के बावजूद हमारी मदद की। ऐसे लोग भाजपा, राजद और कांग्रेस समेत सभी दलों में थे।” गौरतलब है कि पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव की जीत को नवगठित पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। किशोर लगातार इस उपचुनाव को भाजपा नीत बिहार सरकार पर ”जनमत संग्रह” बताते रहे थे।

यह उपचुनाव भाजपा के पांच बार के विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद हुआ था, जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राज्यसभा के लिए चुना गया। किशोर ने इससे पहले कहा था कि भाजपा की हार ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए चेतावनी’ है और उन्हें ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ वाले सम्राट चौधरी की जगह किसी ‘शिक्षित और स्वच्छ छवि’ वाले व्यक्ति को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा किसी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता को मुख्यमंत्री बनाए रखना चाहती है तो उसे ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जिसकी शिक्षा अच्छी हो और जिसकी छवि बेदाग हो। हालांकि, विपक्षी गठबंधन में शामिल होने को लेकर किशोर की अनिच्छा के बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया छात्र आंदोलनों से बने माहौल का लाभ उठाने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन उन्हें अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर सकता है।

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