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Cyber Crime पर नकेल कसने की तैयारी, ठगों के लेनदेन वाले ‘MULE’ Accounts की पहचान के लिए AI का उपयोग करेगी केंद्र सरकार, अमित शाह ने बताया प्लान

New Delhi. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल कर उन ‘MULE’ Accounts की पहचान करने की योजना बना रही है, जिनमें साइबर जालसाज ठगी की रकम जमा करते हैं. शाह ने सोमवार को ‘Cyber ​​security और Cyber ​​crimes’ विषय पर गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सरकार की साइबर अपराध निगरानी और इसका पता लगाने वाली शाखा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की सिफारिशों के आधार पर 805 ऐप एवं 3,266 वेबसाइट लिंक को ‘ब्लॉक’ कर दिया गया है.

अब तक 19 लाख से अधिक ‘म्यूल’ खातों को पकड़ा
उन्होंने कहा कि इसके अलावा 399 बैंक और वित्तीय मध्यस्थ इसमें शामिल हैं, छह लाख से अधिक संदिग्ध डाटा प्वाइंट साझा किए गए हैं, 19 लाख से अधिक ‘म्यूल’ खातों को पकड़ा गया है और 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शाह ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सभी बैंकों के समन्वय में ‘म्यूल’ खातों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करने के प्रयास जारी हैं, ताकि उनका पता लगाने के लिए एक प्रणाली स्थापित की जा सके.

जानें क्या है MULE’ Accounts
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि ये ‘MULE’ Accounts चालू होने से पहले ही बंद कर दिए जाएं. ‘म्यूल’ खाता वह बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग धन शोधन या अवैध गतिविधियों से हासिल धन के लेन-देन के लिये किया जाता है. उन्होंने कहा कि I4C पोर्टल पर कुल 1,43,000 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिसका उपयोग 19 करोड़ से अधिक लोगों ने किया है.

1930’ हेल्पलाइन एक ही जगह पर सभी समाधान
शाह ने कहा कि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मद्देनजर, ‘1930’ हेल्पलाइन एक ही जगह पर सभी समाधान प्रदान करती है, जिसमें कार्ड ब्लॉक करने जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान की जाती हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र ‘रोको-सोचो-कार्रवाई करो’ के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि वे साइबर अपराध के खिलाफ अधिक सतर्क रहें. गृह मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है, जिसके कारण स्वाभाविक रूप से साइबर हमलों की संख्या में वृद्धि हुई है.

अमित शाह ने यह कहा
उन्होंने कहा कि अलग नजरिए से देखें तो साइबरस्पेस ‘सॉफ्टवेयर’, ‘सेवाओं’ और ‘यूजर’ का एक जटिल नेटवर्क बनाता है. उन्होंने कहा, ‘‘जब तक हम सॉफ्टवेयर, सेवाओं और ‘यूजर’ के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी को नियंत्रित करने पर विचार नहीं करते, तब तक साइबरस्पेस के मुद्दों को हल करना असंभव होगा. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने भारत को साइबर-सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा कि साइबर अपराध ने सभी भौगोलिक सीमाओं को मिटा दिया है और इसे ‘सीमाहीन’ अपराध कहा है, क्योंकि इसकी कोई सीमा या तय स्वरूप नहीं है. गृह मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में ‘डिजिटल क्रांति’ देखी है और इस डिजिटल क्रांति के आकार एवं पैमाने को समझे बिना, ‘‘हम साइबर डोमेन में चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते’’. उन्होंने कहा कि आज देश के 95 प्रतिशत गांव डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं, जबकि एक लाख ग्राम पंचायतें वाई-फाई हॉटस्पॉट से लैस हैं.

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