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Raghubar Dash: पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने हेमंत सरकार को घेरा, झारखंड में पेसा कानून लागू करने में देरी करने, निकाय चुनावों को स्थगित करने के लगाये आरोप

Jamshedpur. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत गठबंधन सरकार पर अपने हितों को पूरा करने के लिए झारखंड में पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में जानबूझकर देरी करने और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनावों को स्थगित करने का आरोप लगाया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि अगर पेसा अधिनियम को शीघ्र लागू नहीं किया गया तो झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए चालू वित्त वर्ष के दौरान 1,400 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान समाप्त हो जाएगा.

पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम को आमतौर पर पेसा अधिनियम के नाम से जाना जाता है और इसे 1996 में पूरे देश में लागू किया गया था. यह अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों को मान्यता देता है। हालांकि इसे अभी राज्य में लागू किया जाना बाकी है.

1,700-1,800 करोड़ रुपये से वंचित हो रहा झारखंड
दास ने दावा किया कि इसी तरह यूएलबी चुनाव नहीं होने के कारण शहरी विकास के लिए मिलने वाले 1,700-1,800 करोड़ रुपये के केंद्रीय अनुदान से हर साल राज्य वंचित हो रहा है. दास ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘2019 में भाजपा के कार्यकाल के दौरान हमने पेसा अधिनियम के लिए एक मसौदा तैयार किया था. सरकार बदलने के बाद झामुमो-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन ने 2023 में फिर से पेसा नियमों का मसौदा तैयार किया और उन्हें विभिन्न विभागों को प्रतिक्रिया के लिए भेजा तथा 2024 में इसे कानून विभाग को भेज दिया गया. तब से सरकार ने अपने हितों की पूर्ति के लिए टालमटोल का रवैया अपनाया है. उनके अनुसार, पेसा अधिनियम के कार्यान्वयन से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को रेत घाट के आवंटन, लघु खनिज नीलामी और अन्य स्थानीय संसाधनों पर अधिकार प्राप्त होंगे. दास ने कहा कि 13 जिलों के 112 ब्लॉक इन अनुसूचित क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं.

माफिया गिरोह पेसा कानून लागू करने से रोक रहे
दास ने आरोप लगाया, ‘‘रेत, पत्थर, कोयला और अन्य खनिज माफिया गिरोह सरकार को पेसा कानून लागू करने से रोक रहे हैं। अगर यह कानून लागू हो गया तो नेताओं की जेब में जाने वाले करोड़ों रुपये खत्म हो जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि रेत घाटों की नीलामी न होने से राज्य के खजाने को हर साल 2,000 करोड़ रुपये से 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

सीबीआई जांच की मांग
दास ने कहा कि पेसा कानून को लागू न करके और हमारे आदिवासी समाज को उसके अधिकारों से वंचित करके, झामुमो-कांग्रेस सरकार पिछले छह वर्षों से रेत घाटों, लघु खनिजों और वन उपज का दुरुपयोग कर रही है. मैं पिछले छह वर्षों में हुए अवैध दुरुपयोग की सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच की मांग करता हूं.

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