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Rail Ministry: रेलवे में महाप्रबंधकों को दो जोन का अतिरिक्त प्रभार, अब नियुक्तियों में देरी पर उठ रहे सवाल

New Delhi. रेल मंत्रालय ने मध्य और दक्षिण तट रेलवे जोन के महाप्रबंधकों (जीएम) को तीन महीने के लिए क्रमश: पश्चिम और दक्षिण मध्य जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया है. इन दोनों जोन के महाप्रबंधक 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों के एक वर्ग के अनुसार मंत्रालय समय पर चयन प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहा.
इस बीच, मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चयन प्रक्रिया जारी है और यह पहली बार नहीं है कि किसी एक जोन के महाप्रबंधक को दूसरे जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया हो.रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, इससे किसी जोन में कोई काम, योजनाओं के क्रियान्वयन या निर्णय लेने की प्रक्रिया बाधित नहीं होगी. मंत्रालय के 27 जून को जारी परिपत्र में कहा गया, ‘‘रेल मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि दक्षिण तट रेलवे के महाप्रबंधक संदीप माथुर को अपने पद के अलावा दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के पद का कार्यभार भी तीन महीने की अवधि या किसी नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) संभालना होगा.
परिपत्र में कहा गया है कि वर्तमान महाप्रबंधक अरुण कुमार जैन 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसी तरह के एक आदेश के माध्यम से मंत्रालय ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार मिश्रा का कार्यभार तीन महीने के लिए मध्य रेलवे के महाप्रबंधक धर्मवीर मीणा को सौंप दिया है क्योंकि मिश्रा भी 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.
सेवानिवृत्त महाप्रबंधक और वरिष्ठ अधिकारियों ने नियमित नियुक्तियों में देरी की आलोचना की.एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा, दो महाप्रबंधक की सेवानिवृत्ति पहले से तय थी और यह अचानक नहीं हुआ. यह दर्शाता है कि मंत्रालय समय पर चयन प्रक्रिया को लागू करने में विफल रहा, जिसके कारण वह खुद ही जानता है. मुझे नहीं लगता कि महाप्रबंधक के रूप में नियुक्त किए जाने वाले सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों की कोई कमी है. एक प्रतिष्ठित रेल संस्थान के महानिदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह मंत्रालय की ओर से पर्याप्त तैयारी की कमी का मामला है. दो महाप्रबंधक नियमित सेवानिवृत्ति पर कार्यालय छोड़ रहे हैं और मंत्रालय इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया. कई विशेषज्ञों ने कहा कि महाप्रबंधक के पद पर तीन महीने और मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के पद पर छह महीने पहले ही फैसला हो जाना चाहिए.
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