
New Delhi. रेल मंत्रालय ने सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को सोने की परत चढ़े चांदी का पदक देने की परंपरा बंद कर दी है और यह फैसला बुधवार से ही प्रभावी हो गया है। रेल मंत्रालय द्वारा सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों के प्रमुखों को संबोधित एक परिपत्र में कहा गया है, ‘सेवानिवृत्त होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत चढ़ा रजत पदक प्रदान करने की प्रथा बंद की जा रही है। रेलवे के पास पहले से ही उपलब्ध रजत पदकों का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जाए, जिससे उनके उपयोग संबंधी चिंताओं का समाधान हो सके। परिपत्र में हालांकि कोई कारण नहीं बताया गया, लेकिन अधिकारियों द्वारा बताए गए कारणों में ‘आउटसोर्स’ विक्रेताओं की ओर से मुहैया कराए गए पदकों की खराब गुणवत्ता और चांदी के बहुत महंगा होना आदि शामिल हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘चूंकि पिछले 20 वर्षों में चांदी की कीमत कई गुना बढ़ गई है, इसलिए अनावश्यक खर्चों में कटौती के प्रयास के तहत भी यह फैसला लिया गया हो सकता है। रेल मंत्रालय ने करीब 20 साल पहले मार्च 2006 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले या सामान्य प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्त होने वाले सभी रेलवे कर्मचारियों को लगभग 20 ग्राम वजन का सोने की परत चढ़ा चांदी का पदक प्रदान करने का निर्णय लिया था। शुरुआत में पदक को इस प्रकार डिजाइन किया गया था कि एक तरफ भारतीय रेलवे का लोगो और दूसरी तरफ संबंधित रेलवे जोन या उत्पादन इकाई (पीयू) का नाम या लोगो अंकित होता था।
इन पदकों पर होने वाले व्यय को ‘अवर्गीकृत विविध’ मद के तहत रखा गया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि पदक में इस्तेमाल होने वाली चांदी का वजन 20 ग्राम होगा और उसकी शुद्धता 99.9 प्रतिशत होगी।
