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Railway Workshop Environment : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मोतीबाग वर्कशॉप को प्रतिष्ठित ग्रीनको गोल्ड प्रमाणन

बिलासपुर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के यांत्रिक विभाग ने पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मोतीबाग वर्कशॉप के लिए प्रतिष्ठित ग्रीनको गोल्ड प्रमाणन प्राप्त किया है। यह सम्मान कार्यशाला द्वारा पर्यावरण अनुकूल एवं सतत औद्योगिक प्रक्रियाओं को प्रभावी रूप से अपनाने के लिए प्रदान किया गया है।

यह प्रमाणन सीआईआई-सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिज़नेस सेंटर द्वारा ग्रीनको–ग्रीन कंपनी रेटिंग सिस्टम के अंतर्गत प्रदान किया गया है। यह मान्यता 01 मई 2026 से 30 अप्रैल 2029 तक तीन वर्षों के लिए वैध रहेगी।

ग्रीनको फ्रेमवर्क के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों का मूल्यांकन ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन संरक्षण तथा हरित प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर किया जाता है। गोल्ड रेटिंग प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि मोतीबाग कार्यशाला ने पर्यावरणीय प्रदर्शन और संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के उच्च मानक स्थापित किए हैं।

यह उपलब्धि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के यांत्रिक विभाग की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता और कार्यशाला संचालन में हरित सिद्धांतों के सफल समावेशन को दर्शाती है। साथ ही यह भारतीय रेल की पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ, हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयासों को भी सशक्त करती है।

ग्रीनको गोल्ड प्रमाणन का परिचालन महत्व

यह प्रमाणन मोतीबाग कार्यशाला द्वारा कठोर पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की पुष्टि करता है। इसके अंतर्गत कार्यशाला को वर्ष 2026 से 2029 तक गोल्ड स्तर बनाए रखने हेतु निरंतर हरित मानकों का पालन करना होगा। यह उपलब्धि औद्योगिक इकाइयों के बीच उत्कृष्ट पर्यावरणीय प्रदर्शन का मानक स्थापित करती है तथा भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय हरित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यशाला की प्रतिबद्धता को प्रमाणित करती है।

मोतीबाग कार्यशाला द्वारा अपनाई गई प्रमुख हरित पहलें

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की मोतीबाग कार्यशाला ने ग्रीनको मानकों के अनुरूप अनेक प्रभावी पहलें लागू की हैं।

ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यशाला परिसर में पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था को एलईडी प्रणाली से प्रतिस्थापित किया गया है। ऊर्जा दक्ष मोटर एवं मशीनरी का उपयोग बढ़ाया गया है, सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित किया गया है तथा नियमित ऊर्जा ऑडिट एवं निगरानी प्रणाली लागू की गई है। उपकरणों के स्वचालन और लोड प्रबंधन के माध्यम से ऊर्जा बचत सुनिश्चित की जा रही है।

जल संरक्षण हेतु एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट एवं जल पुनर्चक्रण प्रणाली स्थापित की गई है। कम जल खपत वाली तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है तथा रिसाव नियंत्रण एवं सतत निगरानी के माध्यम से जल अपव्यय को रोका जा रहा है।

अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत ठोस एवं खतरनाक अपशिष्ट का स्रोत स्तर पर पृथक्करण किया जा रहा है। तेल, ग्रीस एवं रासायनिक अपशिष्टों के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कुशल स्क्रैप प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया गया है तथा “ज़ीरो वेस्ट टू लैंडफिल” की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

सामग्री संरक्षण के क्षेत्र में रखरखाव कार्यों में संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित किया गया है। पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के साथ-साथ टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल सामग्री को प्राथमिकता दी जा रही है। बेहतर इन्वेंट्री प्रबंधन और प्रक्रिया सुधारों के माध्यम से अपव्यय को न्यूनतम किया गया है।

मोतीबाग कार्यशाला को प्राप्त यह ग्रीनको गोल्ड प्रमाणन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति सजग कार्यशैली का प्रमाण है और रेलवे अवसंरचना एवं रखरखाव प्रणालियों में हरित पहल को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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