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Safeguard Tarrif: सस्ते स्टेनलेस स्टील आयात से उद्योग निकाय चिंतित, कर दी मांग, कहा- सुरक्षा देने को कदम उठाए सरकार

New Delhi. घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग ने स्थानीय विनिर्माताओं के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार से सुरक्षात्मक शुल्क जैसे कदम उठाने का आग्रह किया है. भारतीय स्टेनलेस स्टील विकास संघ (आईएसएसडीए) ने तैयार स्टील के बढ़ते आयात को भारतीय उद्योग के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि उच्च लागत और बाजार की अस्थिरता से जूझ रहे स्थानीय उत्पादकों को अब सस्ते आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.

उद्योग निकाय के अध्यक्ष राजमणि कृष्णमूर्ति ने इस स्थिति से निपटने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही. इसमें आयात शुल्क बढ़ाना, घरेलू उत्पादन क्षमता में सुधार करना और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर ध्यान देना शामिल है. जिंदल स्टेनलेस के विजय शर्मा ने चीन के खिलाफ मुकाबले में समुचित अवसर की उम्मीद जताते हुए कहा कि चीन से सस्ता आयात पड़ोसी आसियान देशों के रास्ते भारत में खपाया जा रहा है.

शर्मा ने कहा, “हम सभी भारत में चीनी मूल के घटिया स्टेनलेस स्टील की डंपिंग लगातार जारी रहने से अवगत हैं। इसका हमारे घरेलू उत्पादकों, खासकर एमएसएमई इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. बाजार शोध फर्म बिगमिंट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का स्टेनलेस स्टील आयात लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 17.3 करोड़ टन हो गया जिसमें चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और दक्षिण कोरिया का मुख्य योगदान है.

राजपूताना स्टेनलेस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी यश मेहता ने इस आयात को कम करने के लिए सुरक्षात्मक शुल्क लगाने की जरूरत बताई है. स्टेनलेस स्टील उद्योग के हितधारक जून में होने वाले वैश्विक स्टेनलेस स्टील शिखर सम्मेलन 2025 में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

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