
Chaibasa. पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार सुबह से सुरक्षाबलों और भाकपा (माओवादी) नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली समेत 15 नक्सली मारे गए। गुरुवार तड़के मुठभेड़ शुरू हुई। आसपास का इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। जानकारी के मुताबिक झारखंड पुलिस, कोबरा और सेंट्रल पुलिस फोर्स के जवानों की सर्चिग के दौरान 1 करोड़ के इनामी नक्सली अनल दा के दस्ते के साथ मुठभेड़ हुई। उसके दस्ते में 14 से अधिक नक्सली हैं। लगातार हो रही मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 15 नक्सलियों को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि एक करोड़ के इनामी नक्सली अनल दा भी मारा गया है।
छोटानागरा थाना क्षेत्र में हुई इस मुठभेड़ में दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी होती रही। बताया जा रहा है कि सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के वरीय अधिकारियों को सारंडा के जंगली इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर कोबरा, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुरक्षाबल जैसे ही नक्सलियों के ठिकानों के करीब पहुंचे, खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। सुरक्षाबलों को भारी पड़ता देख नक्सली घने जंगल और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आईजी (अभियान) माइकल राज एस ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस और माओवादियों बीच सुबह से मुठभेड़ चल रही है। गौरतलब है कि सारंडा और कोल्हान क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। यहां कई बड़े नक्सली नेताओं की सक्रियता बताई जाती रही है। इनमें मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु और अनल जैसे शीर्ष माओवादी नेताओं के नाम सामने आते रहे हैं। इसके अलावा असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत और रापा मुंडा भी अपने दस्ता सदस्यों के साथ इस इलाके में सक्रिय बताए जाते हैं।
कौन था अनल दा उर्फ तूफान ?
एक करोड़ का इनामी अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश था। वो गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना इलाके के झरहाबाले गांव का रहने वाला था। उसके पिता का नाम टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी है। अनल दा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) यानी सीपीआई (माओ) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम) था। उसे माओवादियों का रणनीतिकार माना जाता था, जो संगठन के लिए बड़ी योजनाएं बनाता था।
वो 1987 से नक्सली के तौर पर एक्टिव था और लंबे समय से सारंडा और गिरिडीह के जंगलों में सक्रिय था। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, हथियार और लूट जैसे कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज थे। इस मुठभेड़ को बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि अनल लंबे समय से मोस्ट वांटेड था और उसके नेटवर्क के कई अन्य माओवादी अभी भी सक्रिय बताए जाते हैं।