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SCHOOL FEE : निजी स्कूलों की मनमानी पर कैसे लगेगी लगाम !, 24 में 22 जिलों में समिति का भी नहीं हुआ गठन

रांची. स्कूलों में नामांकन का मौसम आ गया है. इसके साथ ही शुल्क को लेकर भी स्कूल प्लान बनाने में जुट गये हैं. अब तक के ट्रेंड के अनुसार निजी स्कूल मनमाने तौर पर फीस की बढ़ोतरी करते रहे हैं. झारखंड में प्रशासनिक शिथिलता के कारण झारखंड के कई निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा मौका पाकर अभिभावकों का भरपूर दोहन की जानकारी प्राप्त होती रहती हैं. यह क्रम फिर से शुरू हो गया है. 

मीडिया रिपोर्ट क अनुरूप  झारखंड में कई ऐसे निजी स्कूल हैं जहां शुल्क वृद्धि को लेकर मनमानी की जा रही है. जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के मौन रहने के कारण अभिभावकों का शोषण होने की सूचना मिली हैं. हालांकि तीन वर्ष पूर्व सरकार ने निजी स्कूलों की मानमानी रोकने के लिए गाइडलाइन जारी किया था. इसमें यह प्रावधान किया गया था कि निजी स्कूल बिना अनुमोदन के 10 प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं बढ़ा सकते हैं.

इसके लिए सभी स्कूलों में शुल्क निर्धारण समिति का गठन भी किया गया था और पहले चरण में रांची और बोकारो जिला में ही समिति का गठन किया गया. दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान स्थिति इन दो जिलों को छोड़ बाकी 22 जिलों में समिति का गठन तक नहीं हो पाया है. प्रशासनिक शिथिलता का निजी स्कूल प्रबंधन भरपूर लाभ उठाते हैं. शहर के कई ऐसे निजी स्कूल हैं जहां शुल्क वृद्धि को लेकर मनमानी की जा रही है.

सूत्र बताते हैं कि निजी स्कूलों द्वारा एडमिशन शुल्क से लेकर अन्य गतिविधियों का हवाला देकर शुल्क में वृद्धि की जा रही है. सरकारी नियमानुसार निजी स्कूल 10 प्रतिशत तक ही शुल्क बढ़ा सकते हैं,जबकि कई स्कूलों में यह राशि 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जाने की सूचना मिली है.

यह शुल्क एनुअल चार्ज, बिल्डिंग चार्ज, मिसलिनियस चार्ज, कंप्यूटर चार्ज, गेम्स चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज, सीसीटीवी चार्ज, स्कूल चार्ज, एसएमएस चार्ज, मेडिकल चार्ज, आउटरिच चार्ज और डेवलपमेंट चार्ज को दर्शाकर लिया जा रहा है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सरकार इसे लेकर कितना गंभीर है? अगर सरकार इसे लेकर गंभीर है तो अब तक निजी स्कूलों में कमेटी का गठन क्यों नहीं हुआ?‍ अगर ऐसा नहीं हुआ तो सरकार और शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की?

प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार एवं शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन इस मामले में क्या करवाई कर पाते हैं यह भविष्य के गर्त में है. निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगा कर अभिवावकों को राहत दिलाने की दिशा में क्या करवाई की जायगी इस पर आम लोग सरकार के समक्ष टकटकी लगा कर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं.

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