Site icon Lahar Chakra

Seraikela Kharsawan News :मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना, ईचागढ़ में 12 लाभुकों को मिली बकरी पालन यूनिट, स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरायकेला: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को सुदृढ़ करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत मंगलवार को प्रखंड प्रशासन की देखरेख में ग्रामीण लाभुकों के बीच बकरी पालन (गोअटरी) यूनिट का वितरण किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का सृजन करना और किसानों व पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।

12 चयनित लाभुकों को मिली बकरी पालन की यूनिट

ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के 12 चयनित लाभुकों को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का सीधा लाभ देते हुए बकरी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बकरी पालन को आय का एक बहुत ही सुलभ और बेहतरीन साधन माना जाता है, क्योंकि यह कम लागत में अच्छी आमदनी देता है। प्रशासन की इस कल्याणकारी पहल से इन 12 परिवारों को न केवल अपना स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करने का मौका मिला है, बल्कि इससे उनके जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार आने की पूरी उम्मीद है।

पशुपालन के वैज्ञानिक तरीकों और टीकाकरण की दी गई जानकारी

बकरी पालन के इस वितरण कार्यक्रम के अवसर पर प्रखंड प्रशासन और संबंधित विभाग के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। यूनिट वितरण के साथ-साथ इन पदाधिकारियों ने लाभुकों के साथ संवाद स्थापित किया और उन्हें पशुपालन के वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लाभुकों को बताया गया कि बकरियों की उचित देखभाल कैसे करनी है, उन्हें मौसमी बीमारियों से कैसे बचाना है और सही समय पर उनका टीकाकरण (Vaccination) कितना आवश्यक है। इसके अलावा, बकरियों के सुरक्षित आवास प्रबंधन और उनके पौष्टिक आहार को लेकर भी कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए गए, ताकि लाभुक इस योजना का अधिकतम और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकें।

ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ कर आत्मनिर्भर बनाना है लक्ष्य

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना मुख्य रूप से ग्रामीण विकास और पशुपालन को मजबूती प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है। प्रशासन के अनुसार, इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका को सुदृढ़ करना, पशुपालन के प्रति उन्हें जागरूक करना और स्वरोजगार के अवसर पैदा कर उन्हें पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है। इस तरह की योजनाओं के माध्यम से गांवों से होने वाले पलायन को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।

अधिकारियों को समय-समय पर मार्गदर्शन करने के निर्देश

कार्यक्रम के समापन के दौरान वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा संबंधित विभाग के कर्मचारियों को सख्त निर्देश भी दिए गए। उन्हें निर्देशित किया गया कि यूनिट वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी लाभुकों के साथ नियमित रूप से संपर्क बनाए रखा जाए। पशुपालकों को समय-समय पर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और हर संभव विभागीय सहयोग प्रदान किया जाए। इससे न केवल धरातल पर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, बल्कि यदि किसी लाभुक को बकरी पालन के दौरान कोई समस्या आती है, तो उसका त्वरित और उचित समाधान भी किया जा सकेगा।


Exit mobile version