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JAMSHEDPUR NEWS: श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में जाना जैव विविधता का रहस्य, 4000 साल पुरानी ममी बनी आकर्षण

जमशेदपुर: श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के विद्यार्थियों ने कोलकाता स्थित ऐतिहासिक इंडियन म्यूजियम का शैक्षणिक भ्रमण कर जीव-जंतुओं की विविधता, विकासक्रम, पारिस्थितिकी तंत्र और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। 30 अक्टूबर को आयोजित इस भ्रमण में विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों को वास्तविक नमूनों के माध्यम से समझने का अवसर मिला।

भारत के सबसे बड़े और विश्व के प्राचीन संग्रहालयों में शामिल इंडियन म्यूजियम की विभिन्न दीर्घाओं में संरक्षित जीव-जंतुओं, वनस्पतियों और जीवाश्मों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाई।

समुद्री जीवों से लेकर सरीसृपों तक का अध्ययन

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने इनवर्टिब्रेट गैलरी में कीट-पतंगों, क्रस्टेशियंस, मोलस्क, कोरल और जीवाश्मों के नमूनों का अवलोकन किया।

फिश गैलरी में समुद्री और मीठे पानी की मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के साथ सी हॉर्स, सॉ फिश और शार्क के संरक्षित नमूनों का अध्ययन किया।

एम्फीबिया एंड रेप्टीलिया गैलरी में मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए, सांप और छिपकलियों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान विद्यार्थियों ने जीवों की शारीरिक संरचना और उनकी विशेषताओं को समझा।

व्हेल का कंकाल और ब्लू व्हेल का जबड़ा बना आकर्षण

म्यूजियम की मैमल गैलरी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दीर्घा में 138 प्रजातियों के कुल 314 नमूने प्रदर्शित हैं।

विद्यार्थियों ने यहां 1804 से संबंधित मिंके व्हेल का कंकाल, ब्लू व्हेल का निचला जबड़ा और भारतीय हाथी के कंकाल का अवलोकन किया।

इन नमूनों के माध्यम से उन्हें स्तनधारी जीवों की शारीरिक संरचना, आकार और विकास से जुड़ी जानकारियां प्राप्त हुईं।

पक्षियों की चोंच, पंख और शारीरिक संरचना को समझा

बर्ड गैलरी में विद्यार्थियों ने मोर, हॉर्नबिल, फ्लेमिंगो, शुतुरमुर्ग और पेंगुइन सहित भारतीय एवं विदेशी पक्षियों के नमूने देखे।

इस दौरान विद्यार्थियों ने पक्षियों की चोंच, पंखों की बनावट, शारीरिक संरचना और उड़ान से संबंधित विशेषताओं का अध्ययन किया।

विभिन्न प्रजातियों के नमूनों ने उन्हें पक्षियों की अनुकूलन क्षमता और जैव विविधता को समझने में मदद की।

4000 वर्ष पुरानी मिस्र की ममी ने बढ़ाई जिज्ञासा

इंडियन म्यूजियम की इजिप्शियन गैलरी में संरक्षित लगभग 4000 वर्ष पुरानी मिस्र की ममी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रही।

विद्यार्थियों ने ममी बनाने की प्राचीन प्रक्रिया के बारे में जाना। इसमें आंतरिक अंगों को निकालना, नैट्रॉन नमक की सहायता से शरीर को निर्जलित करना, रेजिन और तेल का उपयोग तथा लिनेन के कपड़े में शरीर को लपेटने जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं।

इस गैलरी ने विद्यार्थियों को प्राचीन सभ्यताओं की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर दिया।

पारिस्थितिकी और औषधीय पौधों की भी मिली जानकारी

इकोलॉजी गैलरी में विद्यार्थियों ने भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र, खाद्य श्रृंखला, जीवों के पारस्परिक संबंध और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।

वहीं, बॉटनी सेक्शन में औषधीय पौधों, लकड़ी, रेशों, तेल, मसालों और हर्बेरियम संग्रह का अध्ययन किया। विद्यार्थियों ने वनस्पतियों के आर्थिक और वैज्ञानिक महत्व को भी समझा।

अनुभव आधारित शिक्षा को मिला बढ़ावा

श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को टैक्सोनॉमी, जैव विविधता, विकासवाद, पारिस्थितिकी और जीवों के संरक्षण से संबंधित विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और पुस्तकीय ज्ञान को वास्तविक अनुभव से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

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