
New Delhi. भारतीय स्टील की कीमतों में आने वाले हफ्तों में और वृद्धि होने की उम्मीद है। अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है मॉनसून के बाद बुनियादी ढांचे और ऑटोमोटिव मांग में वृद्धि से बाजार में कसावट आएगी, जबकि कोकिंग कोल की बढ़ती लागत से मिलों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। कोकिंग कोल की बढ़ती लागत से घटे मार्जिन को ठीक करने में बढ़ी कीमतों से मदद मिल सकती है, लेकिन बुनियादी ढांचे, निर्माण और ऑटो कंपनियों को मांग बढ़ने के साथ ही इनपुट लागत में वृद्धि भी होगी।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे कच्चे स्टील उत्पादक भारत की मिलों ने जून और जुलाई के बीच हॉल रोल्ड कॉइल जैसे उत्पादों की कीमत में 280 रुपये प्रति टन की मामूली कटौती की थी। वहीं कमोडिटी कंसल्टेंसी बिगमिंट के अनुसार अगस्त और सितंबर की शुरुआत के बीच एचआरसी की कीमतों में 4,000 रुपये प्रति टन की वृद्धि हुई, जो चार साल का उच्च स्तर है।
