
New Delhi. घटनाक्रमों से भरे आगामी सप्ताह में कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के परिणाम और मुद्रास्फीति के आंकड़े स्थानीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे. विश्लेषकों ने यह राय जताई है. इसके अलावा वैश्विक बाजार का रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से भी बाजार को दिशा मिलेगी. वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी अलमंड्ज ग्लोबल के वरिष्ठ इक्विटी शोध विश्लेषक सिमरनजीत सिंह भाटिया ने कहा, वैश्विक संकेतक घरेलू शेयर बाजार का रुख तय करते रहेंगे, लेकिन निवेशकों की निगाह भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता के संभावित नतीजों पर रहेगी. अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, ऐसे में कुल मिलाकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. इस अनिश्चित माहौल में कारोबारी कोई बड़ा सकारात्मक दांव लगाने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अगले कुछ सप्ताह के दौरान निवेशकों की निगाह कंपनियों के पहली तिमाही की नतीजों पर रहेगी.
एक विश्लेषक ने कहा कि पिछले सप्ताह बाजार में एक प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर शुल्क को लेकर बनी अनिश्चितता और तिमाही नतीजों के सीजन की निराशाजनक शुरुआत थी. बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 932.42 अंक या 1.11 प्रतिशत नीचे आया.
वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 311.15 अंक या 1.22 प्रतिशत टूट गया. रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘आगे देखें तो कंपनियों का तिमाही नतीजों का सत्र महत्वपूर्ण रहेगा. सप्ताह के दौरान एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी बड़ी कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आने हैं.
वृहद आर्थिक मोर्चे पर, बाजार भागीदारों की निगाह 14 जुलाई को आने वाले थोक मूल्य सूचकांक आधारित (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति और खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रहेगी. साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा.
