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Supreme Court ने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की, पारित किया प्रस्ताव, न्यायाधीशों और वकीलों ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी

New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर किये गए जघन्य आतंकवादी हमले पर बुधवार को दुख व्यक्त किया और इसकी कड़ी निंदा की. शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों और वकीलों ने एक मिनट का मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी.

शीर्ष अदालत ने एक बयान में कहा कि बुधवार सुबह आयोजित पूर्ण न्यायालय की बैठक में न्यायालय ने सर्वसम्मति से आतंकवादी कृत्य की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया.

बयान में कहा गया है,‘हिंसा के इस शैतानी कृत्य ने सभी की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और यह आतंकवाद से फैलने वाली क्रूरता और अमानवीयता की स्पष्ट याद दिलाता है. शीर्ष अदालत के प्रस्ताव में कहा गया, ‘भारत का उच्चतम न्यायालय उन निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देता है, जिनकी आकस्मिक मौत हुई, साथ ही शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना भी व्यक्त करता है. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और जो लोग घायल हुए हैं, वे जल्द ही स्वस्थ हों। इस दुख की घड़ी में राष्ट्र पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़ा है.

बयान में कहा गया है कि भारत के ‘मुकुट’ कश्मीर की प्राकृतिक सुन्दरता का आनंद लेने गए पर्यटकों पर हमला निस्संदेह मानवता के मूल्यों का अपमान है और न्यायालय इसकी कड़ी निंदा करता है.इससे पहले, दोपहर भोज के बाद अपराह्न करीब दो बजे सभी अदालतों ने मौन रखा. अपराह्न करीब 1.59 बजे सायरन बजते ही न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादियों सभी ने मौन अवस्था में खड़े होकर अपराह्न दो बजे तक दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री ने एक परिपत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अपराह्न दो बजे न्यायाधीश, वकील, कर्मचारी और अदालत में मौजूद अन्य व्यक्ति मौन रखेंगे. वकील और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के 300 से अधिक सदस्य आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए उच्चतम न्यायालय के लॉन में एकत्र हुए.

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