
New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने भारत में 47 हजार बच्चों के अब भी लापता होने के आंकड़ों पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को देश भर के पुलिस अधिकारियों को गुमशुदगी के मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया और कहा कि मानव तस्करी रोधी इकाइयों को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह से सक्रिय किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए लापता बच्चों के मामलों की संख्या में वृद्धि पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि वे अक्सर संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों के शिकार होते हैं।
पीठ ने कहा, भारत सरकार के गृह मंत्रालय को निर्देश दिया जाता है कि वह देश के प्रत्येक पुलिस थाने को एक ही मंच से जोड़ने वाला एक अखिल भारतीय नेटवर्क स्थापित करे, जिसमें लापता बच्चों और महिलाओं सहित मानव तस्करी के लिए समर्पित एक विशेष पोर्टल होगा। ये निर्देश जी गणेश द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका पर पारित किए गए थे, जिनकी बेटी 19 सितंबर, 2011 को चेन्नई से लापता हो गई थी।
