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Tata Group और Open I में बड़ी साझेदारी, 100 मेगावाट AI अवसंरचना होगी विकसित, कर्मचारियों को एंटरप्राइज चैटजीपीटी तक पहुंच मिलेगी? चंद्रशेखरन ने बतायी बड़ी उपलब्धि

New Delhi. टाटा समूह और ओपनएआई ने भारत में 100 मेगावाट (एमडब्ल्यू) एआई अवसंरचना विकसित करने की योजना पर आधारित एक रणनीतिक साझेदारी की बृहस्पतिवार को घोषणा की। इसे आगे एक गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही उद्यम स्तर पर एआई की स्वीकार्यता में तेजी लाने, उद्योग-विशिष्ट समाधान विकसित करने और भारतीय युवाओं के लिए एआई कौशल विस्तार के संयुक्त प्रयास भी किए जाएंगे । बहुवर्षीय समझौते के तहत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की ‘हाइपरवॉल्ट’ इकाई एआई-सक्षम, हरित ऊर्जा आधारित अवसंरचना विकसित करेगी जिसे अगली पीढ़ी के एआई कार्यभार को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है।

भारतीय कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘ प्रारंभिक चरण में टीसीएस 100 मेगावाट क्षमता वाली एआई अवसंरचना विकसित करेगा, जिसे एक गीगावाट तक बढ़ाने का विकल्प होगा। यह अवसंरचना अगली पीढ़ी के एआई कार्यभार को संचालित करेगी और भारत को वैश्विक एआई केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। इस सहयोग के तहत टाटा समूह के कई हजार कर्मचारियों को उत्पादकता और नवाचार बढ़ाने के लिए एंटरप्राइज चैटजीपीटी तक पहुंच मिलेगी, जबकि टीसीएस सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग परिणामों को बेहतर बनाने के लिए ओपनएआई के कोडेक्स का उपयोग करेगा। कंपनियां संयुक्त रूप से उद्योग-विशिष्ट एजेंटिक एआई समाधान विकसित करने की योजना बना रही हैं, जिसमें ओपनएआई के उन्नत एआई मंचों को टीसीएस के क्षेत्रीय ज्ञान और विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा।

संयुक्त बाजार रणनीति के तहत टीसीएस भारतीय और वैश्विक उद्यमों के लिए ओपनएआई के एआई समाधानों को लागू, एकीकृत और विस्तारित करेगी जिससे संगठन-व्यापी एआई रूपांतरण को समर्थन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि टीसीएस ने पहले डेटा केंद्र कारोबार के लिए टीपीजी से एक अरब डॉलर का निवेश हासिल किया था और कहा था कि निजी इक्विटी कंपनी इस कारोबार में 27.5 से 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी। ओपनएआई के साथ यह साझेदारी नयी दिल्ली में जारी ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान घोषित की गई है। इससे पहले इन्फोसिस ने उद्यम कृत्रिम मेधा समाधान मुहैया कराने के लिए एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी की घोषणा की थी।

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इसे दोनों इकाइयों के बीच गहन सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा में अग्रणी बनने के दृष्टिकोण की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, “यह ओपनएआई और टीसीएस के लिए उद्योगों को रूपांतरित करने का अनूठा अवसर है। हम मिलकर भारत के युवाओं को कौशल देंगे और उन्हें कृत्रिम मेधा युग में सफल होने के लिए सशक्त बनाएंगे।

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