Mumbai. रतन टाटा के करीबी सहयोगी रह चुके मेहली मिस्त्री ने बृहस्पतिवार को बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के न्यासी पद से 23 अक्टूबर, 2025 को हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी।
मिस्त्री ने टाटा के दो प्रमुख न्यासों के उन दावों का जवाब दिया, जिनमें उनके ट्रस्ट के कामकाज की जांच करने के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाए गए थे। सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने 15 अक्टूबर को न्यासों के संचालन के तौर-तरीकों और हितों के टकराव से जुड़े मामलों को चुनौती देने के मिस्त्री के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाए थे। चैरिटेबल आयुक्त के समक्ष दाखिल तीन जवाबी हलफनामों में मिस्त्री ने न्यासों के खिलाफ अपनी आपत्तियां दोहराते हुए कहा कि ये सवाल पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान आयुक्त ने टाटा ट्रस्ट को तीन दिसंबर तक इन जवाबी हलफनामों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। मिस्त्री ने उन्हें न्यासी के पद से हटाए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि मूल न्यास विलेख में किसी न्यासी का कार्यकाल तीन साल तक सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा को वह लाभ क्यों दिया गया, जिससे उन्हें वंचित रखा गया।

मिस्त्री ने 23 अक्टूबर, 2025 को जारी उनके न्यासी पद की समाप्ति संबंधी परिपत्र की वैधता को चुनौती देते हुए कहा कि नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी, जबकि जिमी एन टाटा ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया था। मिस्त्री ने चैरिटेबल आयुक्त से उस प्रस्ताव की वैधता की जांच करने का अनुरोध किया, जिसके तहत उनका न्यासी पद समाप्त किया गया था। उन्होंने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा लेने वाले न्यासियों के अधिकार और पात्रता की भी जांच करने की मांग की।
मिस्त्री ने आयुक्त से ‘परिवर्तन रिपोर्ट’ को खारिज करने का आग्रह किया। मिस्त्री ने अपने जवाबी हलफनामों में कहा कि बाई हीराबाई न्यास के विलेख के अनुसार, न्यासी का नवसारी या तत्कालीन बंबई प्रेजिडेंसी का निवासी पारसी होना और पारसी धर्म का पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नोएल टाटा इन शर्तों को पूरा करते हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कर निवास से जुड़े सवालों के जवाब में मिस्त्री ने कहा कि नोएल टाटा आयरलैंड के नागरिक हैं और उनके पास यूएई का गोल्डन वीजा है। उन्होंने आयुक्त से सभी न्यासियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया, जिसमें वे न्यास विलेख के तहत अपनी पात्रता की पुष्टि करें। इसमें पारसी जोरोस्ट्रियन धर्म का पालन करने की शर्त भी शामिल है।

