
New Delhi. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि एयर इंडिया का बदलाव एक पांच से 10 साल की लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख कलपुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में वर्षों से चली आ रही बाधाओं, पुरानी प्रणाली में बदलाव, कार्य संस्कृति और बेड़े के आधुनिकीकरण तथा बड़ी संख्या में प्रशिक्षित विमानन पेशेवर तैयार करने की जरूरत को देखते हुए इस परिवर्तन में समय लगेगा।
टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को लिखे पत्र में चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया के कायाकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘इतिहास की हर बड़ी एयरलाइन को खड़ा होने में दशकों का समय लगा है, कुछ तिमाहियों में नहीं यह नहीं होता। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 एयर इंडिया के लिए कई बाहरी चुनौतियों वाला वर्ष रहा।
चंद्रशेखरन ने टाटा संस की 2025-26 की सालाना रिपार्ट में अपने पत्र में कहा, ‘‘हवाई क्षेत्र का बंद होना, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईंधन कीमतों में वृद्धि और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव तथा एआई171 विमान दुर्घटना जैसी कई चुनौतियां रहीं। इन सभी परिस्थितियों में एयर इंडिया की टीम ने मजबूती के साथ काम किया।’’
टाटा समूह ने सरकार से घाटे में चल रही एयर इंडिया का नियंत्रण जनवरी, 2022 में संभाला था और इसके बाद कंपनी ने बड़े स्तर पर बदलाव योजना शुरू की। एयर इंडिया समूह की कंपनियों में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस हैं।
सिंगापुर एयरलाइंस की एयर इंडिया समूह में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है। चंद्रशेखरन ने भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि वर्ष 2047, यानी भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने पर, एक युवा भारतीय एयर इंडिया के ऐसे विमान में यात्रा करेगा, जो भारतीय कलपुर्जों से बना होगा, जिसमें भारतीय जमीन पर विनिर्मित चिप होंगे और जिसकी सुरक्षा भारतीय रक्षा प्रणालियों से होगी।
