Site icon Lahar Chakra

Tata Sons Dispute: टाटा संस में अब दो कंपनियों का होगा विलय…लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने चला नया दांव, कंपनी के पुनर्गठन का रखा प्रस्ताव, जानें क्या है योजना

Mumbai. टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस को एनबीएफसी और प्रमुख निवेश कंपनी (सीआईसी) के नियामकीय दायरे से बाहर लाने के लिए सोमवार को उसके पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा। इसके तहत समूह की दो कंपनियों का टाटा संस में विलय किया जाएगा, जिससे टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखा जा सके। टाटा ट्रस्ट ने एक बयान में कहा कि इस पुनर्गठन के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (टीईएसएस) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का टाटा संस में विलय किए जाने का प्रस्ताव है। ट्रस्ट ने कहा कि उसने टाटा संस के निदेशक मंडल से पुनर्गठन प्रस्ताव पर विचार करने और जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसमें प्रस्तावित विलय के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना भी शामिल है।

टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने का विरोध कर रहे टाटा ट्रस्ट ने कहा कि प्रस्तावित पुनर्गठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्गठित टाटा संस न तो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और न ही सीआईसी के नियामकीय मानदंडों को पूरा करे।

यह प्रस्ताव टाटा संस के निदेशक मंडल और टाटा ट्रस्ट के बीच कंपनी के स्वामित्व ढांचे को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच आया है। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने का विरोध करते रहे हैं। जुलाई, 2025 में दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्ट ने कंपनी को गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई बनाए रखने के प्रयास करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था।

आरबीआई द्वारा 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद सूचीबद्धता का मुद्दा अहम हो गया। टाटा संस ने इस दर्जे से बाहर निकलने का अनुरोध किया था, जिसे आरबीआई ने सितंबर में खारिज कर दिया। टाटा संस के निदेशक मंडल की हाल में हुई बैठक में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किए जाने के बाद टाटा ट्रस्ट के साथ विवाद और गहरा गया है। इस मामले में कानूनी राय भी ली जा रही है।

Exit mobile version