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JAMSHEDPUR NEWS: अब सांकेतिक भाषा से टूटेगी संवाद की बाधा, टाटा स्टील फाउंडेशन ने ISLRTC और CRC रांची से किया समझौता

जमशेदपुर/रांची, 29 अक्टूबर 2026: बधिर और कम सुनने वाले लोगों के लिए संवाद की बाधाओं को दूर करने तथा उन्हें कार्यस्थलों और समाज में समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में टाटा स्टील फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण पहल की है। फाउंडेशन ने इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (ISLRTC) और कंपोजिट रीजनल सेंटर (CRC), रांची के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

28 अक्टूबर को घोषित इस साझेदारी के तहत ‘सबल-संकेत’ (Sabal-Sanket) पहल को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language-ISL) के उपयोग को प्रोत्साहित करना और बधिरजनों के लिए अधिक समावेशी वातावरण तैयार करना है।

टाटा स्टील फाउंडेशन के 10 मास्टर ट्रेनर्स को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

समझौते के तहत टाटा स्टील फाउंडेशन के 10 मास्टर ट्रेनर्स को भारतीय सांकेतिक भाषा का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की मदद से अन्य कर्मचारियों और समुदाय के लोगों तक सांकेतिक भाषा की जानकारी पहुंचाई जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षकों की टीम तैयार करना है, जो बधिरजनों के साथ संवाद को आसान बनाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

कार्यस्थलों पर बधिरजनों के लिए बनेगा समावेशी माहौल

सबल-संकेत पहल का एक प्रमुख लक्ष्य कार्यस्थलों को बधिर और कम सुनने वाले कर्मचारियों के लिए अधिक अनुकूल बनाना है।

इसके लिए टाटा स्टील फाउंडेशन के कर्मचारियों को भारतीय सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को बधिर समुदाय की संस्कृति, उनकी संवाद संबंधी आवश्यकताओं और प्रभावी संचार के तरीकों से परिचित कराया जाएगा।

इससे कार्यस्थलों पर बेहतर संवाद के साथ समान भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

सांकेतिक भाषा सीखने के लिए तैयार होगी विशेष अध्ययन सामग्री

तीनों संस्थान मिलकर भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रशिक्षण के लिए शिक्षण मॉड्यूल और सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री भी विकसित करेंगे।

इस सामग्री का उपयोग प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और समुदाय आधारित गतिविधियों में किया जा सकेगा।

इसका उद्देश्य सांकेतिक भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना और इस पहल का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।

तीन संस्थानों के प्रमुखों ने किए MoU पर हस्ताक्षर

इस समझौता ज्ञापन पर इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक राजू, सीआरसी रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद और टाटा स्टील फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सौरव रॉय ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर स्किल डेवलपमेंट, सबल एंड स्पोर्ट्स के हेड अमिताभ भी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि सीआरसी रांची भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत कार्यरत संस्थान है।

समावेशन की शुरुआत संवाद से होती है: सौरव रॉय

टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने इस साझेदारी को बधिरजनों के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा, “समावेशन की शुरुआत संवाद से होती है और समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे से संवाद कर पाना बेहद जरूरी है।”

सौरव रॉय ने कहा कि ISLRTC और CRC रांची के साथ साझेदारी के माध्यम से सांकेतिक भाषा का कौशल विकसित करने, जागरूकता बढ़ाने और ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जहां बधिर और कम सुनने वाले लोग सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ भागीदारी कर सकें।

बधिरजनों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पहल

सबल-संकेत पहल के जरिए केवल सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि समाज और कार्यस्थलों में संवाद संबंधी बाधाओं को कम करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

तीनों संस्थानों की यह साझेदारी बधिरजनों की सामाजिक भागीदारी, सम्मानजनक संवाद और समान अवसरों को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक संस्थागत प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

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