Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने रविवार को बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा को निर्देश दिया कि वे बोकारो में ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (सेल) की इकाई ‘बोकारो स्टील लिमिटेड’ (बीएसएल) के द्वार को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए तत्काल कदम उठाएं। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत रविवार अपराह्न 2:15 बजे सेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई।
दशहरे की छुट्टियों के कारण बंद उच्च न्यायालय सुनवाई के लिए खुला और कोर्ट नंबर तीन में कार्यवाही हुई। सेल के वकील इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि बोकारो की विधायक श्वेता सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने इस्पात संयंत्र के परिसर की नाकेबंदी कर रखी है।
सिन्हा ने अदालत को बताया, कर्मचारी और मजदूर कल से ही संयंत्र के अंदर फंसे हुए हैं और बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने इस्पात संयंत्र के सभी 11 गेट अवरुद्ध कर दिए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया कि लगभग 5,000 कर्मचारी संयंत्र के अंदर फंसे हुए थे और प्रदर्शनकारी उन्हें बाहर नहीं जाने दे रहे। उन्होंने बताया कि संयंत्र के अंदर कच्चा माल नहीं आ पा रहा जबकि तैयार माल भी बाहर नहीं भेजा जा पा रहा। ऐसे में करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। सिन्हा ने बताया कि इससे संयंत्र को प्रतिदिन लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। याचिका पर सुनवाई के बाद, अदालत ने कहा कि किसी आंदोलन की वजह से इस्पात संयंत्र जैसी राष्ट्रीय संपत्ति को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता।
अदालत ने बोकारो के उपायुक्त और एसपी को निर्देश दिया कि वे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि संयंत्र में लोगों का आना-जाना बिना किसी रुकावट के हो सके। इस मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को फिर से होगी, जब अवकाश के बाद उच्च न्यायालय में नियमित कामकाज फिर से शुरू हो जाएगा।
