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Tata Steel का शुभारंभ Geo Scientist PN Bose की जिस खोज की वजह से हुई, उसे 121 साल पहले JN Tata को एक पत्र के जरिए बताया था, पढ़िये उस पत्र का मजमून

पीएन बोस द्वारा जेएन टाटा को लिखा गया पत्र.

Jamshedpur.जमशेदपुर में Tata Steel तब की TISCO की नींव Geo Scientist पीएन बोस (प्रमथ नाथ बोस) द्वारा जेएन टाटा को 24 फरवरी 1904 को भेजे एक पत्र की वजह से हुआ था. 24 फरवरी को उस भेजे गये पत्र के आज 121 साल पूरे हो गये हैं. स्व. पीएन बोस ने जेएन टाटा को जो पत्र लिखा था, उसकी वजह से जमशेदपुर में देश के पहले Steel Industry TISCO, वर्तमान में Tata Steel की स्थापना 26 अगस्त 1907 को हुई.

टाटा ने मात्र 2.31 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ भारत में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) के रूप में टाटा स्टील को पंजीकृत किया गया. 1908 में निर्माण शुरू हुआ और 16 फरवरी, 1912 को स्टील से उत्पादन शुरू हो गया. पीएन बोस ने JN Tata को लिखे पत्र में वर्तमान ओडिशा के मयूरभंज में उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क और झरिया में प्रचुर मात्रा में कोयले की उपलब्धता पर प्रकाश डाला.

उनकी इस जानकारी ने टाटा समूह की औद्योगिक योजनाओं को नया आयाम दिया और आगे चलकर साकची में TISCO की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया. पीएन बोस का पत्र न केवल इतिहास की दिशा बदलने वाला साबित हुआ. बल्कि इसने भारतीय इस्पात उद्योग की नींव रखी और देश के औद्योगिक भविष्य को आकार दिया. इस तरह से, पूर्वी भारत के आदिवासी क्षेत्र में टाटा अभियान दल का प्रवेश हुआ, जो अब तक भारत के पहले स्टील प्लांट की स्थापना के लिए संभावित स्थान की खोज कर रहा था. भू-वैज्ञानिक पीएन बोस द्वारा जेएन टाटा को लिखा गया पत्र ऐतिहासिक बन गया, जिसने भारतीय इस्पात उद्योग की नींव रख दी.

जानें पीएन बोस के बारे में
12 मई, 1855 को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के गैपुर नामक सुदूर गांव में जन्मे भूविज्ञानी स्वर्गीय पीएन बोस ने लंदन विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1878 में रॉयल स्कूल ऑफ माइंस से उत्तीर्ण हुए. भूविज्ञानी के रूप में अपने वर्षों के दौरान, उन्होंने मध्य प्रदेश के धुल्ली और राजहरा में लौह अयस्क खदानों की खोज की. उनके जीवन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि मयूरभंज राज्य के गोरुमहिसानी की पहाड़ियों में लौह अयस्क भंडार की खोज थी. खोज के बाद, स्वर्गीय पीएन बोस ने 24 फरवरी, 1904 को जेएन टाटा को एक पत्र लिखा, जिसके कारण साकची में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना हुई.

बोस के नाम कई ऐसे काम हैं जो पहली बार किए गए. वे ब्रिटिश विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक करने वाले पहले भारतीय थे; असम में पेट्रोलियम की खोज करने वाले पहले व्यक्ति थे; भारत में साबुन का कारखाना लगाने वाले पहले व्यक्ति थे और पेट्रोलियम संबंधी काम में सहायता के लिए माइक्रो सेक्शन शुरू करने वाले भी पहले व्यक्ति थे. वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में ग्रेडेड पद पाने वाले पहले भारतीय भी थे, जहाँ उन्होंने सम्मान के साथ काम किया.

विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के रूप में, उन्होंने लगातार देश में तकनीकी शिक्षा के लिए काम किया. उनके प्रयासों ने बंगाल तकनीकी संस्थान की नींव भी रखी, जिसे आज जादवपुर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, जिसके बोस पहले मानद प्राचार्य थे.

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