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झारखंड TET में स्थानीय भाषाओं की अनदेखी पर उबाल, सिंहभूम में भोजपुरी भवन में हुई बैठक

जमशेदपुर : सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद की एक अहम बैठक रविवार को गोलमुरी स्थित भोजपुरी भवन में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष श्री अरविंद विद्रोही ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड सरकार द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के स्थानीय विषयों में से भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका जैसी प्रमुख भाषाओं को हटाने के निर्णय का विरोध करना था।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार का यह कदम उन लाखों भाषायी लोगों के साथ सीधा अन्याय है जो वर्षों से इन भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए प्रयासरत हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन भाषाओं को झारखंड की स्थानीय भाषाओं से बाहर करना, न केवल भाषिक विविधता को नुकसान पहुंचाता है बल्कि यह उन युवाओं के अवसर भी छीनता है जो इन भाषाओं में दक्षता रखते हैं।

बैठक में यह तय किया गया कि दिनांक 16 जून 2025 को भोजपुरिया समाज द्वारा माननीय उपायुक्त कार्यालय में जाकर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नाम एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से यह आग्रह किया जाएगा कि भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा में पुनः शामिल किया जाए।

सदस्यों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने समय रहते इन भाषाओं को मान्यता नहीं दी और आदेश वापस नहीं लिया, तो समाज को विवश होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।

बैठक में बड़ी संख्या में परिषद के सक्रिय सदस्य मौजूद रहे जिनमें प्रमुख रूप से:
प्रदीप सिंह, अप्पू तिवारी, मिथिलेश प्रसाद श्रीवास्तव, मुन्ना चौबे, जगदीश मिश्रा, सागर राय, वीर कुमार सिंह, रामेश्वर कुमार, अरुण शुक्ला, राजेश कुमार, उमेश प्रसाद, जयप्रकाश सिंह, ऋषभ सिंह, अमित कुमार सिंह, संदीप सिंह, श्याम जी तिवारी, दीपक सिंह, अनिकेत केसरी एवं आशीष जी शामिल थे।

यह विरोध न सिर्फ भाषायी अधिकारों की मांग है, बल्कि यह राज्य में सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने की भी मांग है।

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