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Treasury Scam: CID ने 1.8 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये की दो एफडी को ‘फ्रीज’ किया, अब करोड़ रुपये गबन का पता लगाया, तीन गिरफ्तार

Ranchi. झारखंड के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने बोकारो कोषागार घोटाले के संबंध में 10 करोड़ रुपये के धन के स्रोत का पता लगाया है। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। सीआईडी ने 1.8 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये की दो सावधि जमा (एफडी) को ‘फ्रीज’ कर दिया जिन्हें कथित तौर पर बोकारो कोषागार से कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था। बयान में कहा गया है कि सीआईडी ने बोकारो पुलिस विभाग के लेखाकार कौशल कुमार पांडे के अलावा दो पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार पुलिसकर्मियों में एएसआई अशोक कुमार भंडारी और होम गार्ड जवान सतीश कुमार शामिल हैं। भंडारी के घर पर छापेमारी के दौरान कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। भंडारी की संपत्तियों में बोकारो के तेलिडीह में 4.08 डेसिमल जमीन और उस पर बना तीन मंजिला आलीशान मकान तथा साथ ही 4.98 डेसिमल जमीन का एक और टुकड़ा शामिल है।

सीआईडी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की और तीनों व्यक्तियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पांडे को राम नरेश सिंह, उपेंद्र सिंह, एस कुमार और कई अन्य लोगों के नाम पर राजकोष के वेतन वितरण खाते से कथित तौर पर छह करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

कोषागार अधिकारी गुलाब चंद ओरांव द्वारा बोकारो स्टील सिटी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, हजारीबाग जिले में पुलिस विभाग की लेखा शाखा में कार्यरत तीन व्यक्तियों शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेन्द्र सिंह को पिछले आठ वर्षों में दो बैंक खातों से कथित तौर पर 15.41 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में आठ अप्रैल को गिरफ्तार किया गया।

बाद में नौ अप्रैल को इस मामले के संबंध में दो और व्यक्तियों, शंभू सिंह की पत्नी काजल कुमारी और रजनीश सिंह की पत्नी खुशबू कुमारी को गिरफ्तार किया गया। हाल ही में 26 अप्रैल को पश्चिम सिंहभूम जिला कोषागार से “27 लाख रुपये के गबन” में कथित संलिप्तता के आरोप में एक पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।
मामला सामने आने के बाद चाईबासा के कोषागार अधिकारी सुमित कुमार सिंह के बयान के आधार पर मुफस्सिल पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान, 28 अप्रैल को पुलिस ने पड़ोसी पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका ब्लॉक से मुख्य आरोपी कांस्टेबल लेखाकार देव नारायण मुर्मू, उसके रिश्तेदारों अरुण कुमार मर्डी और सरकार हेम्ब्रोम सहित चार लोगों को और ओडिशा के मयूरभंज जिले से उसके दोस्त गोराचंद मर्डी को भी गिरफ्तार किया।

धोखाधड़ी के जरिए धन निकासी की खबरों के मद्देनजर, राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सभी जिला कोषागारों का व्यापक ऑडिट (लेखापरीक्षा) करने का आदेश दिया।

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