Jamshedpur. सिंहभूम चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अपने प्लैटिनम जुबिली समारोह की कड़ी में मंगलवार को कदमा स्थित कुडी मोहंती ऑडिटोरियम में ‘ईस्टर्न इंडिया : ए केलाइडोस्कोप ऑफ ऑपच्र्युनिटीज- जमशेदपुर दी फोकल प्वाइंट’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया. इसमें टाटा स्टील के एमडी सह सीईओ टीवी नरेंद्रन मुख्य अतिथि और टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट (कारपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदर रामम सम्मानित अतिथि थे. अपने संबोधन में नरेंद्रन ने विश्व के वर्तमान भू राजनैतिक हालातों का टाटा स्टील और भारत पर असर से लेकर स्थानीय उद्योगों को भविष्य की राह दिखाई. उन्होंने कहा कि 75 सालों में भारत ही नहीं टाटा स्टील ने बहुत बदलाव देखे. झारखंड का भी जन्म इन्हीं वर्षों में हुआ है. ये बदलाव बतलाते हैं कि किसी भी संस्थान या कंपनी के लिए नियमित बदलाव जरूरी है, इसलिए हमेशा बदलाव के लिए तैयार रहें. सिंहभूम चैंबर सहित एक्सएलआरआई, एनएमएल और आईआईटी खडग़पुर भी अपनी स्थापना के 75वां वर्ष मना रहे हैं. इन संस्थाओं ने भारत का भविष्य तैयार किया.

बढ़ सकती है स्टील की कीमतें
टाटा स्टील के एमडी ने कहा कि इजराइल और ईरान के युद्ध का असर टाटा स्टील पर भी पड़ेगा. यह कंपनी चूंकि ग्लोबल है, लेकिन भारतीय संयंत्रों पर इसका असर कम पड़ेगा, क्योंकि प्लस प्वाइंट यह है कि टाटा स्टील के भारत में होने वाले उत्पादन का 95 फीसदी स्टील की खपत यहीं होती है. लेकिन यूरोप प्लांट से उत्पादित स्टील पर इसका असर पड़ेगा. युद्ध की वजह से तेल की कीमत बढ़ेगी तो शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी, इससे स्टील की कीमत भी बढ़ेगी. युद्ध के हालात जितनी जल्द निबट जाये, उतना अच्छा है.
देश का जीडीपी ग्रोथ से हर सेक्टर को होगा लाभ
टीवी नरेंद्रन ने कहा कि देश के जीडीपी ग्रोथ से हर सेक्टर को लाभ मिलेगा. जीडीपी ग्रोथ 6.50 तक पहुंचना निश्चित तौर पर बढ़िया संकेत है. इससे देश का विकास और तेजी से हो सकेगा. दुनिया में सबसे तेज इकॉनॉमी भारत की ही है. जमशेदपुर के विकास पर रहेगा फोकस, कई और क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत
जमशेदपुर में निवेश पर जोर
टाटा स्टील के एमडी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जमशेदपुर के विकास पर टाटा स्टील का फोकस रहा है. टाटा स्टील के अलावा भी कई तरह के निवेश यहां लाने की जरूरत है. ऑटोमोबाइल सेक्टर हो या फिर सर्विस सेक्टर या फिर कोई और सेक्टर जहां निवेश बढ़ाने की जरूरत है. टाटा स्टील की जहां तक बात है तो तार कंपनी, टिनप्लेट समेत अन्य डाउन स्ट्रीम कंपनियों में निवेश किया जा रहा है. लेकिन टाटा स्टील के प्लांट की क्षमता 11 मिलियन टन से ज्यादा नहीं किया जा सकता है. इस कारण इसके औद्योगिक विकास को लेकर अन्य निवेश की भी जरूरत होगी.
सात गुना बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यस्था
श्री नरेंद्रन ने कहा, डिजिटलाइजेशन का क्षेत्र काफी व्यापक है. अब हम कहीं से भी उत्पादन कर अपने सामानों की डिलीवरी कहीं भी कर सकते हैं. इसके लिए हमें वेयर हाउस की जरूरत नहीं, सप्लाई चेन तैयार है,उसका इस्तेमाल करें.छोटी पहल कर बड़े सपने देंखे. भारतीय अर्थव्यवस्था आज चार ट्रिलियन डालर की है. तीन दशक बाद यह सात गुणा तक बढ़ जाएगी.
चेम्बर ने अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है : सुंदर रामम
इससे पहले टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट डी बी सुंदर रामम ने कहा कि इन 75 सालों में चेम्बर ने अपनी प्रासंगकिता साबित की है. किसी संस्थान का 75 साल तक लगातार कार्यरत रहना बहुत बड़ी चीज है. चैम्बर के सदस्यों की संख्या भी बढ़ी है जिससे साबित होता है कि संस्था में लोगों का यकीन बढ़ा है. टाटा स्टील के साथ चेम्बर के रिश्ते हमेशा प्रगाढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील ने अपनी स्थापना के वक्त एशिया का पहला इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाया था और मेड इन इंडिया का स्लोगन तो टाटा ग्रुप के संस्थापकों जेएन टाटा, दोराबजी टाटा ने सौ साल पहले ही चरितार्थ कर दिखा दिया था.
नरेंद्र और नरेंद्रन’ को दैवीय शक्तियां मिली हुई हैं : मूनका
चेम्बर के अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने अपने संबोधन में संस्थान के अब तक के सफर पर संक्षिप्त प्रकाश डाला और कहा कि चैम्बर को टाटा स्टील का हमेशा सहयोग मिला है. मूनका ने कहा कि पूर्वी भारत में अवसरों की भरमार है और इसके केंद्र में जमशेदपुर है. सौ साल से टाटा स्टील निजी उद्योगों के लिए प्रकाश स्तंभ की मानिंद काम कर रहा है. जिस तरह देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आगे बढ़ रहा है, उसी तरह टाटा स्टील टी वी नरेंद्रन की अगुवाई कामयाबी की नई गाथाएं लिख रहा है.