
Waqf Amendment Bill Challenged in Supreme Court: वक्फ संशोधन बिल को लेकर इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है. वक्फ संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. बिहार के कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद देश के शीर्ष न्यायालय में बिल के खिलाफ याचिका दायर की है. मोहम्मद जावेद बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद हैं. मोहम्मद जावेद वक्फ को लेकर बनीं जेपीसी के सदस्य भी रहे हैं.
याचिका में कहा गया है कि ये बिल मुसलमानों के अधिकारों के साथ भेदभाव करने वाला है. इसके साथ ही ये संशोधन विधेयक संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत समानता के अधिकार, अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धर्म और धार्मिक गतिविधियों के पालन और प्रबंधन का अधिकार, अनुच्छेद 29 में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा का हनन करता है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार किया है या नहीं, अबतक इस पर जानकारी सामने नहीं आई है.
3 अप्रैल को राज्यसभा से हुआ था पास
बता दें कि वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया है. वक्फ बिल राज्यसभा में गुरुवार (3 अप्रैल) देर रात पास हुआ. राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े. राज्यसभा में बिल पर 14 घंटे से ज्यादा चर्चा के बाद देर रात 2.32 बजे राज्यसभा से वक्फ विधेयक पारित हो गया.
2 अप्रैल को लोकसभा से हुआ था पास
वहीं इससे पहले लोकसभा में बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ बिल पेश किया गया था. जिसपर करीब 12 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई और देर रात बिल को पारित कर दिया गया था. लोकसभा में बिल के पक्ष में कुल 288 वोट और विरोध में 232 वोट पड़े थे. वहीं, राज्यसभा में बिल को 128 सांसदों का समर्थन मिला जबकि 95 बिल के खिलाफ डाले गए थे.
पीएम मोदी ने कहा
संसद के दोनों सदनों से वक्फ बिल पास होने पर पीएम नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने बैंकॉक पहुंच पीएम मोदी ने थाईलैंड से वक्फ बिल पर राय रखते हुए मुस्लिम समाज के लोगों को स्पेशल मैसेज भेजा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार चार ट्वीट किए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने वक्फ बिल को सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुस्लिमों और पसमांदा समाज को फायदा होगा.
पीएम मोदी ने लिखा कि- संसद के दोनों सदनों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक का पारित होना सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास के लिए हमारी सामूहिक खोज में एक महत्वपूर्ण क्षण है. इससे विशेष रूप से उन लोगों को मदद मिलेगी जो लंबे समय से हाशिये पर हैं, जिससे उन्हें आवाज़ और अवसर दोनों से वंचित रखा गया है.
