


Jamshedpur. आज रोजगार के लिए स्किल्ड मैनपावर की जरूरत है. इस कारण झारखंड सरकार स्किल डेवलपमेंट पर तेजी से काम कर रही है. उद्यमी यह बतायें कि उनको कैसा स्किल्ड मैनपावर चाहिए, झारखंड सरकार उसी अनुरुप युवाओं को तैयार करके देगी. अपने यहां झारखंड के लोकल लोगों को रोजगार दें. यह अपील राज्य के श्रम मंत्री संजय यादव ने की है. वे ‘कौशल अंतर विश्लेषण और स्थानीय उद्योग की कौशल मांग का पता लगाना’ विषय पर गोलमुरी के एक होटल में गुरुवार को आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.
इस मौके पर तीन कंपनियों के साथ एमओयू किया गया. इस एमओयू के तहत रांची के अरविंद मिल्स, 20-50 हेल्थ केयर और मैंगो एंड ऑरेंज कंपनी अपने यहां झारखंड सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग प्राप्त युवाओं को रोजगार देगी, जबकि उनके यहां ऑन जॉब ट्रेनिंग भी देगी. इससे पहले दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. इस मौके पर श्रम मंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्यशाला से स्थानीय स्तर पर उद्यम प्रतिनिधियों से समन्वय बनाने में मदद मिलेगी. समय-समय पर उद्योगों की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षण में आवश्यक बदलाव करना जरूरी है.
उद्यमी भी समय-समय पर अपनी जरूरतें बताते रहें, तो प्रशिक्षण एवं रोजगार में तालमेल बना रहेगा. उन्होंने उद्यमियों से अपील की है कि वे बाहर से दक्ष कर्मचारियों को न लाकर, राज्य के भीतर प्रशिक्षित युवाओं को ही नौकरी में प्राथमिकता दें. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर हम विभाग के स्तर से और प्रशिक्षण केंद्र खोलेंगे. कार्यक्रम को श्रमायुक्त संजीव बेसरा, झारखंड स्किल मिशन के डीजीएम शैलेंद्र कुमार लाल, आइएचएम रांची के प्राचार्य भूपेश कुमार, टाटा मोटर्स के डीजीएम गोपाल मिश्रा सहित कई अन्य प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया. इस मौके पर मोबाइल एप श्रमाधान का अनावरण मंत्री संजय प्रसाद यादव ने किया. इसमें आधार आधारित रजिस्ट्रेशन की सुविधा है. इस मौके पर करीब दो दर्जन प्रशिक्षित युवक-युवतियों को प्रमाण पत्र सौंपा गया, जिनका प्लेसमेंट हो चुका है.
कौशल विकास विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि हम अपने बच्चों को पढ़ाने की बजाय हूनरमंद बनाना शुरू कर दें, तो बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो जायेगा. उन्होंने कहा कि दक्ष कर्मचारियों का पलायन रोकने के लिए उन्हें बेहतर वेतन देना चाहिए, ताकि वे लोग काम छोड़कर नहीं जायें. दक्ष कर्मचारियों का पलायन बड़ी समस्या है. कर्मचारी यहां से ट्रेनिंग लेने के बाद राज्य में रुकने की बजाय महानगरों के अलावा बेंगलुरु, पुणे, तमिलनाडु, राजस्थान और अफ्रीकी देश कैमरून चले जा रहे हैं. यह चिंता का विषय है. उन्होंने बताया कि हमने न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ायी है.



